छत्तीसगढ़ में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। हर साल हजारों लोग इन हादसों में अपनी जान गंवा रहे हैं। हाल ही में सामने आए सरकारी आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं का ग्राफ पहले की तुलना में और ऊपर गया है। कई जिलों में हादसों के साथ-साथ मौतों की संख्या भी चिंताजनक रूप से बढ़ी है।
दिलचस्प और चिंताजनक बात यह है कि जिन इलाकों को कभी नक्सल हिंसा के कारण जाना जाता था, वहां अब सड़क दुर्घटनाएं भी बड़ी समस्या बनती जा रही हैं।
एक साल में 461 हादसे बढ़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, साल 2024 में छत्तीसगढ़ में 14,857 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गई थीं, जबकि 2025 में यह संख्या बढ़कर 15,318 हो गई। यानी एक साल के भीतर 461 नए हादसे दर्ज हुए।
इसी तरह घायलों की संख्या में भी वृद्धि दर्ज की गई है।
- 2024 में 12,484 लोग घायल हुए थे
- 2025 में 13,135 लोग घायल हुए
मौतों में थोड़ी कमी, लेकिन संख्या अब भी बड़ी
अगर मौतों के आंकड़ों पर नजर डालें तो 2024 में सड़क हादसों में 6,945 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 2025 में यह संख्या घटकर 6,728 रह गई। हालांकि इसमें मामूली गिरावट आई है, लेकिन यह आंकड़ा अभी भी बेहद चिंताजनक माना जा रहा है।
इन जिलों में बढ़ा मौतों का आंकड़ा
प्रदेश के कई जिलों में सड़क दुर्घटनाओं में मौतों की संख्या पहले से ज्यादा दर्ज की गई है। इनमें कुछ जिले ऐसे भी हैं जहां स्थिति ज्यादा गंभीर होती जा रही है।
- महासमुंद – मौतों में लगभग 16% की वृद्धि
- कबीरधाम – लगभग 32% बढ़ोतरी
- कांकेर – करीब 11% की बढ़ोतरी
- सुकमा – सबसे ज्यादा 54% तक बढ़ोतरी
वहीं दंतेवाड़ाजिले में सड़क हादसों में घायलों की संख्या 115% तक बढ़ गई है। यह वही क्षेत्र हैं जिन्हें लंबे समय तक नक्सल हिंसा के लिए जाना जाता रहा है।
हादसों के पीछे कई गंभीर कारण
सड़क सुरक्षा से जुड़े विशेषज्ञों के मुताबिक प्रदेश में बढ़ते हादसों के पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं। इनमें सड़क निर्माण और रखरखाव की खामियां, साथ ही ट्रैफिक नियमों का पालन नहीं करना प्रमुख वजहें हैं।
मुख्य कारण
- कई हाईवे और सड़कों पर खतरनाक अंधे मोड़
- ट्रैफिक संकेतकों की कमी
- गड्ढों से भरी खराब सड़कें
- नियमित मेंटेनेंस का अभाव
- कई जगहों पर स्ट्रीट लाइट नहीं
- रात के समय दुर्घटनाओं का ज्यादा खतरा
- ओवरलोड वाहनों पर नियंत्रण की कमी
- स्पीड मॉनिटरिंग सिस्टम बड़े शहरों तक सीमित
प्रदेश में कई जगह ब्लैक स्पॉट भी चिन्हित किए गए हैं, लेकिन कई स्थानों पर इन्हें सुधारने का काम अभी तक पूरा नहीं हो पाया है।
स्पीड गन और सीसीटीवी से निगरानी
सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए पुलिस और ट्रैफिक विभाग कई स्तर पर कार्रवाई कर रहे हैं। ट्रैफिक पुलिस द्वारा नियमित चेकिंग अभियान, ओवरलोड वाहनों पर कार्रवाई और ब्लैक स्पॉट पर निगरानी की जा रही है।
इसके अलावा प्रमुख चौक-चौराहों और राष्ट्रीय राजमार्गों पर स्पीड गन और सीसीटीवी कैमरों के जरिए तेज रफ्तार वाहनों पर नजर रखी जा रही है। त्योहारों और वीकेंड के दौरान पुलिस पेट्रोलिंग भी बढ़ा दी जाती है।
नशे में ड्राइविंग और ओवरस्पीडिंग बड़ी वजह
पुलिस के अनुसार सड़क हादसों के पीछे सबसे बड़ी वजह नशे में वाहन चलाना और तेज रफ्तार है। इसके अलावा हेलमेट या सीट बेल्ट नहीं पहनना, गलत दिशा में वाहन चलाना और ट्रैफिक नियमों की अनदेखी भी दुर्घटनाओं का कारण बनती है।
इसे रोकने के लिए ट्रैफिक पुलिस समय-समय पर ड्रंक एंड ड्राइव अभियान चलाती है। इस दौरान शराब पीकर वाहन चलाने वालों की जांच ब्रेथ एनालाइजर से की जाती है। दोषी पाए जाने पर चालान, लाइसेंस निलंबन और कानूनी कार्रवाई की जाती है।
लोगों को जागरूक करने की कोशिश
यातायात नियमों के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए पुलिस कई कार्यक्रम चला रही है।
- स्कूल और कॉलेजों में ट्रैफिक अवेयरनेस प्रोग्राम
- सोशल मीडिया और पोस्टरों के जरिए सुरक्षित ड्राइविंग का संदेश
- चौक-चौराहों पर हेलमेट चेकिंग अभियान
- नियमों का पालन करने वालों को सम्मानित करना
इन पहलों के जरिए लोगों को सुरक्षित ड्राइविंग के लिए प्रेरित किया जा रहा है।






