इंटरनेट कटौती पर सख्त हुए सांसद बृजमोहन अग्रवाल: “बिजली मीटर की तरह हो ब्रॉडबैंड बिलिंग”

Madhya Bharat Desk
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नई दिल्ली। आज के समय में इंटरनेट सिर्फ सुविधा नहीं बल्कि एक बुनियादी ज़रूरत बन चुका है। ऐसे में जब बार-बार नेटवर्क कट जाता है और उपभोक्ताओं को बिना सेवा के भी पूरा बिल भरना पड़ता है, तो यह सीधे तौर पर उनके साथ अन्याय जैसा महसूस होता है। इसी मुद्दे को लेकर रायपुर से सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने लोकसभा में आवाज उठाई है।

संसद में बोलते हुए उन्होंने टेलीकॉम कंपनियों की जवाबदेही तय करने की जरूरत पर जोर दिया। उनका कहना है कि उपभोक्ताओं को उतनी ही सेवा का भुगतान करना चाहिए, जितनी उन्हें वास्तव में मिलती है। उन्होंने “पे-पर-यूज़” मॉडल लागू करने की वकालत करते हुए कहा कि ब्रॉडबैंड बिलिंग को बिजली के मीटर की तरह बनाया जाना चाहिए, जहां सेवा बंद होने पर बिलिंग भी अपने आप रुक जाए।

उन्होंने टेलीकॉम रेगुलेटरी ऑथोरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) के सेवा गुणवत्ता नियमों में संशोधन की मांग करते हुए कहा कि मौजूदा व्यवस्था में उपभोक्ताओं के हितों की पर्याप्त सुरक्षा नहीं हो पा रही है। लगातार आ रही शिकायतों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि कई उपभोक्ताओं को हर महीने 5 से 6 दिन तक इंटरनेट बंद रहने की समस्या झेलनी पड़ती है, वहीं कुछ मामलों में 12 से 48 घंटे तक नेटवर्क पूरी तरह ठप रहता है। इसके बावजूद कंपनियां पूरा मासिक शुल्क वसूल रही हैं।

देश में इंटरनेट उपयोग तेजी से बढ़ रहा है और प्रति व्यक्ति डेटा खपत भी लगातार ऊपर जा रही है, लेकिन इसके साथ सेवा की गुणवत्ता में सुधार नहीं दिख रहा। सोशल मीडिया पर भी बड़ी संख्या में लोग खराब नेटवर्क, धीमी स्पीड और शिकायतों के समाधान न मिलने की बात कर रहे हैं। कई यूजर्स का कहना है कि उनकी शिकायतें बिना समाधान के ही बंद कर दी जाती हैं, जिससे उनकी परेशानी और बढ़ जाती है।

लोकसभा के 18वें सत्र के दौरान नियम 377 के तहत इस मुद्दे को उठाते हुए अग्रवाल ने सरकार से आग्रह किया कि उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए सेवा गुणवत्ता नियमों में बदलाव किया जाए। उनका साफ कहना है कि जब सेवा उपलब्ध नहीं है, तो उसका शुल्क लेना उचित नहीं है और बिलिंग सिस्टम को अधिक पारदर्शी और न्यायसंगत बनाया जाना चाहिए।

अगर इस दिशा में कदम उठाया जाता है, तो इससे न केवल उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी, बल्कि टेलीकॉम कंपनियों पर भी बेहतर सेवा देने का दबाव बढ़ेगा।

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