रायपुर।एनआईटी चौपाटी को लेकर छत्तीसगढ़ की राजनीति में घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस मुद्दे पर कांग्रेस ने शुक्रवार को भाजपा सरकार के खिलाफ अनोखे तरीके से विरोध दर्ज कराया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने एनआईटी चौपाटी स्थल पर ही ‘सद्बुद्धि यज्ञ’ का आयोजन किया। इस दौरान कार्यकर्ता भाजपा नेता और उपमुख्यमंत्री अरुण साव तथा विधायक राजेश मुणत के पोस्टर हाथ में लेकर हवन करते नजर आए।
कांग्रेस का आरोप है कि एनआईटी चौपाटी को आमानाका शिफ्ट करने का फैसला जल्दबाजी, मनमानी और राजनीतिक दबाव में लिया गया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि बिना वैकल्पिक व्यवस्था पूरी किए चौपाटी हटाना कारोबारियों और आम नागरिकों दोनों के साथ अन्याय है।
जहां संचालित होती थी चौपाटी, वहीं किया प्रदर्शन
कांग्रेस का यह विरोध उसी स्थान पर हुआ, जहां पहले एनआईटी चौपाटी संचालित होती थी। कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने बिना ठोस योजना के दुकानों को हटाकर सैकड़ों लोगों की रोज़ी-रोटी संकट में डाल दी है।
21 नवंबर को हुआ था बड़ा टकराव
गौरतलब है कि 21 नवंबर को चौपाटी की शिफ्टिंग के दौरान भारी विवाद हुआ था। कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने बुलडोजर के सामने बैठकर विरोध किया था। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झूमाझटकी हुई, कई कांग्रेस कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर सेंट्रल जेल भेजा गया। विवाद के बीच चौपाटी तो हटा दी गई, लेकिन नई जगह अब तक पूरी तरह तैयार नहीं हो सकी है।
मनमाने फैसले का आरोप
कांग्रेस लगातार इस फैसले को मनमाना और राजनीतिक दबाव में लिया गया कदम बता रही है। कुछ दिन पहले विवाद और बढ़ गया, जब युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विधायक राजेश मुणत के पोस्टर पर कालिख पोत दी। इसके बाद पुलिस ने युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष सहित कई कार्यकर्ताओं के खिलाफ FIR दर्ज की। इसके विरोध में युवा कांग्रेस और NSUI ने सरस्वती नगर थाने का घेराव भी किया था।
उच्चस्तरीय जांच की मांग
विपक्ष की मांग है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही उन अधिकारियों पर भी कार्रवाई हो, जिन्होंने पहले चौपाटी को अनुमति दी और अब उसे अवैध करार दे रहे हैं। कांग्रेस का कहना है कि सत्ता परिवर्तन के बाद राजनीतिक दबाव में प्रशासनिक फैसले बदले गए।
10 करोड़ की चौपाटी बना सियासी मुद्दा
एनआईटी चौपाटी के विकास पर लगभग 10 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। सरकार बदलने के बाद भाजपा सरकार ने यहां ‘नालंदा-2’ विकसित करने का फैसला लिया और नवंबर 2025 में इसका टेंडर भी पूरा कर लिया। इसके बाद यह मामला प्रशासनिक निर्णय से निकलकर बड़े राजनीतिक विवाद में तब्दील हो गया।
महापौर का बयान
महापौर मीनल चौबे का कहना है कि आमानाका में चौपाटी के लिए तेजी से व्यवस्थाएं की जा रही हैं। लाइटिंग, सफाई और अन्य सुविधाओं पर काम चल रहा है और जल्द ही चौपाटी शुरू कर दी जाएगी। हालांकि, मौजूदा हालात कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। अंधेरा, गंदगी और अधूरी सुविधाएं दुकानदारों की चिंता बढ़ा रही हैं, जिससे विवाद और गहराता जा रहा है।







