नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा के लिए प्रस्तावित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में भारत को शामिल होने का आमंत्रण दिया है। खास बात यह है कि भारत के साथ-साथ पाकिस्तान को भी इस बोर्ड में शामिल होने का न्योता मिला है। पाकिस्तान की ओर से यह दावा किए जाने के कुछ ही घंटों बाद भारत को आमंत्रण मिलने की खबर सामने आई।
यह बोर्ड अमेरिका की मध्यस्थता में इजरायल और हमास के बीच हुए सीजफायर समझौते के दूसरे चरण से जुड़ा है। प्रस्तावित संस्था का मकसद युद्ध से तबाह गाजा में शासन व्यवस्था, पुनर्निर्माण, निवेश और अंतरराष्ट्रीय पूंजी जुटाने की प्रक्रिया की निगरानी करना है।
बोर्ड की भूमिका और संरचना
रॉयटर्स के मुताबिक, एक अमेरिकी पत्र और ड्राफ्ट चार्टर में बताया गया है कि ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की अध्यक्षता खुद राष्ट्रपति ट्रंप करेंगे। शुरुआती तौर पर यह बोर्ड गाजा संकट पर फोकस करेगा, लेकिन भविष्य में इसे अन्य वैश्विक संघर्षों के समाधान के लिए भी विस्तारित किया जा सकता है।
अगर भारत इस प्रस्ताव को स्वीकार करता है, तो वह अन्य सदस्य देशों की तरह तीन साल के कार्यकाल के लिए बोर्ड का हिस्सा बनेगा। रिपोर्ट्स के अनुसार, स्थायी सदस्यता के लिए प्रत्येक देश को एक अरब डॉलर का योगदान देना होगा, जिससे बोर्ड की गतिविधियों को फंड किया जाएगा। हालांकि, शुरुआती तीन साल के कार्यकाल के लिए किसी तरह के वित्तीय योगदान की अनिवार्यता नहीं है।
गाजा के भविष्य पर नजर
एपी की रिपोर्ट के मुताबिक, सीजफायर प्रस्ताव के दूसरे चरण में गाजा के लिए कई बड़े कदम शामिल हैं। इनमें एक नई फलस्तीनी प्रशासनिक समिति का गठन, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बल की तैनाती, हमास का निरस्त्रीकरण और व्यापक स्तर पर गाजा का पुनर्निर्माण शामिल है। इन सभी प्रक्रियाओं की निगरानी ‘बोर्ड ऑफ पीस’ करेगा।
कूटनीतिक मायने क्या?
ट्रंप द्वारा दुनिया भर के नेताओं को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि इस बोर्ड में शामिल देश ‘फाउंडिंग मेंबर’ होंगे। इसका उद्देश्य वैश्विक संघर्षों को सुलझाने के लिए एक नया और व्यापक मंच तैयार करना है। भारत और पाकिस्तान, दोनों को एक साथ आमंत्रित किया जाना दक्षिण एशिया की कूटनीति और वैश्विक राजनीति में नए समीकरणों की ओर इशारा करता है।







