हसदेव अरण्य में अडानी की MDO कोयला खदान के खिलाफ उबाल, सरगुजा में हजारों लोग सड़क पर

Madhya Bharat Desk
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विपक्ष में रहते हुए भाजपा हसदेव अरण्य की कोयला खदानों को भ्रष्टाचार से जोड़कर लगातार सवाल उठाती रही, लेकिन सत्ता में आने के बाद अब वही पार्टी इस पूरे मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए है। अडानी समूह को दी जा रही एमडीओ कोयला खदान परियोजनाओं को लेकर सरकार की यह खामोशी अब सरगुजा में बड़े जनआक्रोश में बदलती नजर आ रही है।

हसदेव अरण्य क्षेत्र में प्रस्तावित अडानी की एमडीओ कोयला खदान, केते एक्सटेंशन परियोजना के खिलाफ सोमवार को सरगुजा संभाग में हजारों लोगों ने जोरदार प्रदर्शन किया। इस परियोजना के तहत करीब सात लाख पेड़ों की कटाई प्रस्तावित है, जिससे पूरे इलाके के पर्यावरण, जैव विविधता और आदिवासियों की आजीविका पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

आदिवासी समुदाय, किसान और शहरी नागरिक बड़ी संख्या में जंगल, जमीन और पर्यावरण बचाने की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे। प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण और अनुशासित रहा, लेकिन लोगों को तब गहरा झटका लगा जब कलेक्टर ज्ञापन लेने और जनसमस्याएं सुनने अपने कक्ष से बाहर नहीं आए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि प्रशासन का यह रवैया सरकार की मंशा को उजागर करता है।

प्रदर्शनकारियों ने सीधे तौर पर राज्य सरकार पर अडानी समूह के हित में काम करने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि हसदेव अरण्य जैसे संवेदनशील वन क्षेत्र को कोयला खनन के हवाले करना न सिर्फ पर्यावरणीय अपराध है, बल्कि आदिवासी अधिकारों पर सीधा हमला भी है।

प्रशासन की अनदेखी के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने साफ किया है कि उनका आंदोलन यहीं नहीं रुकेगा। हसदेव अरण्य को बचाने की लड़ाई अब और तेज होगी और जब तक कोयला खदान परियोजना को रद्द नहीं किया जाता, तब तक विरोध लगातार जारी रहेगा।

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