नेपाल की मौजूदा राजनीतिक अस्थिरता और सरकार बदलने की अटकलों के बीच पुरी पीठ के शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती की 2018 में कही गई बातें फिर सुर्खियों में हैं। उस समय उन्होंने स्पष्ट कहा था कि नेपाल में स्थिर सरकार लंबे समय तक टिकना कठिन है और सत्ता परिवर्तन बार-बार होता रहेगा।
शंकराचार्य ने 2018 में क्या कहा था?
नेपाल यात्रा के दौरान धार्मिक सभाओं में शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती ने कहा था कि—
- नेपाल में राजनीतिक अस्थिरता बनी रहेगी।
- गठबंधन सरकारें ज्यादा समय तक टिक नहीं पाएंगी।
- सत्ता परिवर्तन नेपाल की राजनीति की पहचान बन जाएगा।
नेपाल का भविष्य तभी सुरक्षित होगा जब वह सनातन संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों को अपनाएगा।
उस दौर की राजनीतिक स्थिति
2018 में केपी शर्मा ओली के नेतृत्व में वामपंथी गठबंधन की मजबूत सरकार बनी थी। आम लोगों को उम्मीद थी कि अब नेपाल में स्थिरता आएगी। लेकिन शंकराचार्य ने पहले ही चेतावनी दी थी कि यह स्थिरता स्थायी नहीं होगी।
मौजूदा हालात और भविष्यवाणी की याद
पिछले कुछ वर्षों में नेपाल में बार-बार सरकार बदली, प्रधानमंत्री बदलते रहे और गठबंधन टूटते-बनते रहे। हालिया राजनीतिक उठापटक ने फिर वही स्थिति बना दी है, जिसकी भविष्यवाणी शंकराचार्य ने सात साल पहले की थी।
विशेषज्ञों की राय
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नेपाल में सत्ता परिवर्तन के पीछे कई कारण हैं—
- जातीय और क्षेत्रीय राजनीति
- गठबंधन की मजबूरी
- कमजोर संस्थागत ढाँचा
- अंतरराष्ट्रीय दबाव
इसी वजह से नेपाल में राजनीतिक स्थिरता कायम नहीं हो पाती।
जनता में चर्चा
नेपाल और भारत, दोनों जगह सोशल मीडिया पर लोग इस भविष्यवाणी पर चर्चा कर रहे हैं। समर्थक इसे शंकराचार्य की दिव्य दृष्टि बताते हैं, वहीं आलोचक कहते हैं कि नेपाल की राजनीति का स्वभाव ही अस्थिर है।







