बालाघाट।बालाघाट जिले की प्रतिष्ठित सांस्कृतिक संस्था नूतन कला निकेतन के मंच पर मंगलवार की शाम आदिवासी लोकसंस्कृति का भव्य उत्सव देखने को मिला। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से संस्कृति सौरभ ग्रामीण विकास शिक्षा एवं जन कल्याण समिति, भोपाल द्वारा प्रस्तुत करमा नृत्य और अन्य पारंपरिक आदिवासी नृत्यों ने दर्शकों का मन मोह लिया।
इस अवसर पर बालाघाट जिले के सुप्रसिद्ध ग्राम सोनपुरी को उसकी सांस्कृतिक विरासत और लोककला संरक्षण के लिए विशेष रूप से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में मौजूद अतिथियों, कला प्रेमियों और स्थानीय दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।
दरअसल, नूतन कला निकेतन में स्वर्गीय शेषमणि पाण्डेय स्मृति करमा नृत्य के तहत चार दिवसीय सांस्कृतिक आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम के अंतर्गत “आंचलिक धरोहर” नृत्य दल ने करमा शैला, सुआ, बिहाव, ददरिया सहित कई पारंपरिक आदिवासी नृत्यों की मनोहारी प्रस्तुतियां दीं, जो देर रात तक चलती रहीं।
विशेष आकर्षण रहा गेढ़ी नृत्य, जिसका नेतृत्व समाजसेवी अमन गौतम द्वारा किया गया। यह नृत्य न केवल बालाघाट बल्कि अन्य जिलों में भी अपनी अलग पहचान बना चुका है जिसका नेतृत्व अमन गौतम द्वारा किया जाता है। गेढ़ी नृत्य दल के मुखिया संतोष कोलते एवं उनके 16 साथी कलाकारों की ऊर्जावान और सजीव प्रस्तुति ने पूरे पंडाल को मंत्रमुग्ध कर दिया।
नूतन कला निकेतन के अध्यक्ष रूप बनवाले ने कहा कि संस्था का उद्देश्य विलुप्त होती लोकसंस्कृति और आदिवासी परंपराओं को सहेजना है। ऐसे आयोजन आने वाली पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करते हैं। ग्रामीण अंचलों में विवाह, दशहरा, दीपावली, नई फसल, नया चांद दर्शन जैसे अवसरों पर किए जाने वाले नृत्य, उत्सव और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की झलक मंच के माध्यम से प्रस्तुत करना एक सराहनीय प्रयास है।

उत्सव में समाजसेवी और गेढ़ी नृत्य के नेतृत्वकर्ता अमन गौतम मौजूद रहे एवं गेढ़ी नृत्य दल में , संतोष कोलते, सुजल परते, मनोज नेवारे, राजकुमार सहारे, मुकेश कोलते, अंकित चौरगाड़े, धनराज सहारे, जितेंद्र बर्वे, घनश्याम कोड़पे, रवि उईके, रूही कोलते, खुशी कोलते और दामिनी दुर्गेश्वरी ठाकरे सहित अन्य कलाकार शामिल रहे।



