दुर्ग पुलिस ने सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे की सुनियोजित साजिश का पर्दाफाश करते हुए भुईंया पोर्टल को हैक कर 700 एकड़ से ज्यादा सरकारी भूमि को फर्जी तरीके से अन्य लोगों के नाम चढ़ाने वाले गिरोह के 7 सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया है। इस मामले में इससे पहले 3 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
पूरा मामला तब सामने आया जब तत्कालीन तहसीलदार राधेश्याम वर्मा ने नंदिनी थाने में शिकायत दर्ज कराई कि ग्राम अछोटी और मुरमुंदा के भुईंया पोर्टल में सॉफ्टवेयर हैक कर छेड़छाड़ की गई और इसके आधार पर सीबीआई बैंक शाखा नंदिनी से 36 लाख रुपये का फर्जी आहरण किया गया।
जांच में सामने आया कि आरोपी दिनुराम यादव, एसराम बंजारे सहित कई लोगों ने जमीन के मूल खसरा नंबरों में गड़बड़ी कर नए खसरा नंबर तैयार किए और इन्हें अन्य लोगों के नाम चढ़ा दिया।
पहले गिरफ्तार हुए आरोपी एन.के. साहू, अमित मौर्य और गणेश तंबोली ने पूछताछ में बताया कि पूरे हेरफेर के लिए अशोक उरांव को पटवारी का यूजर आईडी, पासवर्ड और ओटीपी मुहैया कराया गया था।
अशोक उरांव ने बताया कि उसे यह जानकारी संजय वर्मा के माध्यम से मिली थी, जिसने मुरमुंदा पटवारी के एक सहायक (विधि से संघर्षरत बालक) को 1.5 लाख रुपये देकर लॉगिन डिटेल्स प्राप्त किए थे। इसके बाद आरोपी फर्जी दस्तावेज बनाकर सरकारी जमीनों को दूसरे के नाम कर बैंक से लोन उठा रहे थे।
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि रायपुर के कोमल साहू के जरिए संजय ने कौशल फेकर, ओम प्रकाश निषाद, देवानंद साहू और शिवचरण कौशल को पोर्टल में हेरफेर करने के लिए कंप्यूटर ऑपरेटर के रूप में जोड़ा।
पुलिस ने अब तक अशोक उरांव, कौशल फेकर, शिवचरण कौशल, ओम प्रकाश निषाद, कोमल साहू, देवानंद साहू और एक नाबालिग आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश कर दिया है।
गिरफ्तार आरोपी शिवचरण कौशल पर इसी तरह का एक पुराना मामला कोरबा जिले के पसान थाने में भी दर्ज है।







