रायपुर। महापौर मीनल चौबे ने निगम के पर्यावरण एवं उद्यानिकी विभाग की समीक्षा बैठक में टाउन एंड कंट्री प्लानिंग एक्ट का हवाला देते हुए अधिकारियों से स्पष्ट जानकारी मांगी कि उद्यान की 5% भूमि का वास्तविक उपयोग क्या होना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि उद्यानों का व्यावसायीकरण शहर की खूबसूरती और पर्यावरण दोनों को नुकसान पहुँचाता है।
महापौर चौबे ने कहा कि राजधानी के उद्यान केवल हरियाली, शांति और नागरिकों की सुविधा के लिए बने हैं। इन्हें होटल, चौपाटी या नाश्ते की दुकानों का केंद्र बनाना शहर के पर्यावरण और नागरिकों की अपेक्षाओं के साथ अन्याय होगा। उन्होंने साफ संकेत दिया कि रायपुर में अब किसी भी उद्यान का व्यावसायीकरण नहीं होने दिया जाएगा।
बैठक में नगर निगम पर्यावरण एवं उद्यानिकी विभाग अध्यक्ष भोला राम साहू, अपर आयुक्त विनोद पाण्डेय, अधीक्षण अभियंता संजय बागडे, उपायुक्त जसदेव सिंह बाबरा, ईई गजाराम कंवर समेत सभी 10 जोनों के उद्यान विभाग के उपअभियंता मौजूद रहे।

नागरिकों को मिली बड़ी राहत
महापौर के इस सख्त रुख से नागरिकों में खुशी की लहर है। विशेषकर बूढ़ा तालाब प्रोजेक्ट को लेकर बन रही चौपाटी का लोगों ने लंबे समय से विरोध किया था। अब उम्मीद है कि इस चौपाटी को रोककर तालाब की प्राकृतिक सुंदरता को सुरक्षित रखा जाएगा।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि राजधानी रायपुर के लिए पहली बार किसी महापौर ने इतनी दूरदर्शिता और गंभीरता से सोचा है। अगर मेयर चौबे का इसी तरह सहयोग मिलता रहा तो रायपुर स्वच्छ, हरित और आधुनिकता से भरपूर शहर के रूप में पहचान बनाएगा।
निगम की सख्ती से बढ़ी उम्मीदें
महापौर चौबे के निर्देशों के बाद नगर निगम ने भी कार्रवाई तेज कर दी है। द पंजाबी रेस्टोरेंट पर सफाई मानकों का पालन न करने और कटोरा तालाब क्षेत्र में गंदगी फैलाने के चलते 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया।
यह कार्रवाई निगम स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. तृप्ति पाणीग्रही, जोन स्वास्थ्य अधिकारी वीरेन्द्र चंद्राकर और स्वच्छता निरीक्षक गिरीजेश तिवारी की मौजूदगी में की गई।







