Budget 2026 पर सियासी घमासान: CM साय ने बताया जनकल्याणकारी, दीपक बैज बोले – आम आदमी से धोखा, भूपेश– शेखचिल्ली का शोरबा

Madhya Bharat Desk
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रायपुर।केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए केंद्रीय बजट 2026–27 को लेकर छत्तीसगढ़ की राजनीति गरमा गई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जहां इसे ऐतिहासिक और देश की आर्थिक दिशा तय करने वाला बताया है, वहीं कांग्रेस नेताओं ने इस बजट को आम जनता के खिलाफ और कॉरपोरेट समर्थक करार दिया है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रायपुर स्थित कुशाभाऊ ठाकरे भाजपा प्रदेश कार्यालय में बजट भाषण सुनने के बाद कहा कि यह कर्तव्य भवन में तैयार किया गया पहला बजट है, जो भारत के विकास की नई नींव रखेगा। उन्होंने कहा कि यह बजट सार्वजनिक निवेश को बढ़ावा देगा और कृषि, ग्रामीण विकास, उद्योग तथा रोजगार सृजन को नई गति देगा।

सीएम साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की अर्थव्यवस्था लगभग 7 प्रतिशत की दर से आगे बढ़ रही है। ‘सबका साथ, सबका विकास’ की सोच के साथ तैयार यह बजट स्वास्थ्य, शिक्षा, आयुष, पर्यटन, जलमार्ग, हाई-स्पीड रेल, मेडिकल टूरिज्म, बायोफार्मा निवेश और शहरी-ग्रामीण आधारभूत ढांचे को मजबूत करेगा। उन्होंने छत्तीसगढ़ की जनता की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के प्रति आभार भी जताया।

वहीं, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने बजट पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यह बजट आम आदमी के लिए नहीं, बल्कि बड़े औद्योगिक घरानों के फायदे के लिए बनाया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और महंगाई जैसे बुनियादी मुद्दों पर यह बजट पूरी तरह विफल साबित हुआ है।

दीपक बैज ने कहा कि बजट में छत्तीसगढ़ की एक बार फिर अनदेखी की गई है। राज्य के कोयला और खनिज संसाधनों के दोहन की योजनाएं तो दिखाई गई हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ के विकास के लिए कोई ठोस आर्थिक पैकेज नहीं दिया गया। उन्होंने इसे “डबल इंजन सरकार द्वारा राज्य के साथ धोखा” बताया।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने सरकार के उस दावे पर भी सवाल उठाया, जिसमें 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालने की बात कही गई है। उन्होंने कहा कि जब आज भी करीब 81 करोड़ लोग मुफ्त राशन पर निर्भर हैं, तो ऐसे दावे जमीन से जुड़े नहीं हैं। युवाओं, किसानों और छोटे व्यापारियों के लिए यह बजट निराशाजनक है।

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी बजट पर कटाक्ष करते हुए कहा कि यह “शेखचिल्ली का शोरबा” है। उन्होंने कहा कि सरकार बड़े-बड़े दावे करती रही कि देश विश्व गुरु बन गया है, लेकिन बजट ने इन दावों की हकीकत उजागर कर दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले वित्तीय वर्ष में न तो राजस्व बढ़ पाया और न ही टैक्स वसूली में मजबूती आई।

भूपेश बघेल ने कहा कि इस बार के बजट में बातें बहुत हैं, लेकिन ठोस परिणाम नजर नहीं आते। आम जनता, मिडिल क्लास, गरीब, किसान, मजदूर और युवाओं के लिए इस बजट में कुछ भी राहत देने वाला नहीं है। उन्होंने इसे अव्यवहारिक और मिडिल क्लास विरोधी करार दिया।

पूर्व मुख्यमंत्री ने शेयर बाजार का हवाला देते हुए कहा कि बाजार में गिरावट साफ संकेत है कि मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों से जनता और निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ है।

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