कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश द्वारा उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की प्रशंसा ने पार्टी के भीतर नेतृत्व और अनुशासन को लेकर नई बहस को जन्म दे दिया है।
यही धनखड़ हैं जिनके खिलाफ कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे सहित पूरा विपक्ष हाल ही में संसद में अविश्वास प्रस्ताव लेकर आया था। विपक्ष का आरोप था कि उपराष्ट्रपति बार-बार उनकी आवाज़ को दबाते हैं और संसद की गरिमा को ठेस पहुंचाते हैं।
अब जयराम रमेश का यह कहना कि जगदीप धनखड़ लोकतंत्र और संसदीय परंपराओं के मजबूत स्तंभ हैं, पार्टी की सामूहिक सोच और दिशा पर सवाल खड़े करता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान पार्टी नेतृत्व, खासकर राहुल गांधी की अनुमति के बिना दिया गया है, जिससे कांग्रेस की अंदरूनी एकता और नेतृत्व की अहमियत पर प्रश्नचिन्ह लगता है।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या कांग्रेस व्यक्तिगत विचारों को पार्टी लाइन से ऊपर मानने लगी है?
अगर नहीं, तो क्या जयराम रमेश का बयान पार्टी अनुशासन का उल्लंघन नहीं है?
पार्टी को चाहिए कि वह स्थिति स्पष्ट करे —
या तो इस बयान को आधिकारिक माने,
या फिर जयराम रमेश से सार्वजनिक स्पष्टीकरण की मांग करे।
वरना जनता पूछेगी — कौन चला रहा है कांग्रेस?



