रायपुर। वर्ष 2024 में आयोजित “छत्तीसगढ़ ग्रीन समिट” कार्यक्रम को लेकर अब बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। तखतपुर क्षेत्र के जन-प्रतिनिधि प्रतीक पाण्डेय ने वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप को तीन पन्नों का पत्र लिखकर कार्यक्रम के आयोजन में कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की जांच की मांग की है।
सबसे खास बात यह है कि अपने पत्र में स्वयं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा से प्रेरित होने का उल्लेख करने वाले पाण्डेय ने ही सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उनका आरोप है कि शिकायत के बावजूद अब तक EOW/ACB को जांच की अनुमति नहीं दी गई, जिससे सरकार की मंशा पर संदेह पैदा हो रहा है।
पत्र में कहा गया है कि 14 फरवरी 2026 को आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW/ACB) को इस मामले में शिकायत भेजी गई थी। इसके बाद EOW/ACB ने जांच शुरू करने के लिए शासन से अनुमति मांगी, लेकिन अब तक अनुमति नहीं मिल पाई है।

पाण्डेय ने अपने पत्र में स्पष्ट लिखा है कि शिकायत प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख वी. श्रीनिवास राव के खिलाफ है। ऐसे में विभागीय स्तर पर जांच कराना निष्पक्ष नहीं माना जा सकता और स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराना जरूरी है।
पत्र में यह भी कहा गया है कि यदि आरोपित अधिकारी उसी विभाग में प्रभावशाली पद पर बने रहते हैं तो वे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जांच को प्रभावित कर सकते हैं। प्रशासनिक नियमों के अनुसार किसी भी अर्ध-न्यायिक प्रक्रिया में यह जरूरी है कि जांच निष्पक्ष और स्वतंत्र माहौल में हो।

तीन पन्नों के इस पत्र में पाण्डेय ने सरकार से कई सीधे सवाल भी पूछे हैं। उन्होंने पूछा है कि भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए EOW/ACB को अनुमति क्यों नहीं दी जा रही है। क्या इसके पीछे कोई दबाव या हित काम कर रहे हैं? और क्या सरकार भ्रष्टाचार के आरोपों पर कार्रवाई करने के बजाय अधिकारियों को संरक्षण दे रही है?
राजनीतिक हलकों में यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि आरोप लगाने वाले व्यक्ति ने अपने पत्र में स्वयं को RSS की विचारधारा से प्रेरित बताया है। ऐसे में अपने ही वैचारिक पृष्ठभूमि से जुड़े व्यक्ति द्वारा सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाना सरकार के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकता है।
पाण्डेय ने अपने पत्र के अंत में कहा है कि यदि भ्रष्टाचार के आरोपों की निष्पक्ष जांच नहीं कराई जाती तो इससे सरकार की छवि पर भी सवाल खड़े होंगे और आम जनता का भरोसा कमजोर होगा। उन्होंने सरकार से मांग की है कि मामले में पारदर्शिता दिखाते हुए EOW/ACB को तत्काल जांच की अनुमति दी जाए।



