किस बात का डर? गणतंत्र दिवस समारोह में राहुल–खरगे को तीसरी पंक्ति में बैठाने पर भड़की कांग्रेस

Madhya Bharat Desk
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नई दिल्ली।गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को तीसरी पंक्ति में बैठाए जाने को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि यह कदम न केवल प्रोटोकॉल की अनदेखी है, बल्कि विपक्ष के शीर्ष नेताओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने की कोशिश भी है।

पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर यह साफ हो गया है कि सरकार राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे से डरती है। उन्होंने सवाल किया कि क्या सरकार विपक्ष के नेताओं को जनता की नजरों से छिपाना चाहती है। वड़िंग ने कहा कि चाहे जितना भी अपमान किया जाए, देश की जनता कांग्रेस और उसके नेतृत्व को पसंद करती है, जिसने देश के निर्माण में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है।

मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि जब राजनीति हावी हो जाती है, तो ऐसे फैसले सामने आते हैं। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी लोकसभा में विपक्ष के नेता हैं और स्वाभाविक रूप से उनका स्थान प्रधानमंत्री के बाद होना चाहिए। उनके परिवार और राष्ट्र के प्रति योगदान को कोई नकार नहीं सकता।

कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने इस फैसले को सरकार की संकीर्ण सोच का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि पूर्व में विपक्ष के नेता—चाहे वह सुषमा स्वराज हों, अरुण जेटली या लालकृष्ण आडवाणी—हमेशा सम्मानजनक स्थान पर बैठते रहे हैं। टैगोर ने कहा कि गणतंत्र दिवस राजनीतिक द्वेष का मंच नहीं, बल्कि देश की उपलब्धियों को मिलकर मनाने का अवसर है।

कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने भी कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राहुल गांधी लोकसभा में और मल्लिकार्जुन खरगे राज्यसभा में विपक्ष के नेता हैं। ऐसे में उन्हें अग्रिम पंक्ति में स्थान न देना भाजपा की राजनीतिक मानसिकता को उजागर करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा लगातार कांग्रेस नेतृत्व की गरिमा को कम करने का प्रयास कर रही है।

वहीं, कांग्रेस की वरिष्ठ नेता कुमारी शैलजा ने कहा कि यह सरकार बार-बार विपक्ष और संवैधानिक पदों की गरिमा को छोटा दिखाने की कोशिश करती रही है। उन्होंने कहा कि प्रोटोकॉल का पालन लोकतंत्र की आत्मा है और गणतंत्र दिवस जैसे अवसर पर इस तरह का व्यवहार यह दर्शाता है कि सरकार को संविधान और गणतांत्रिक मूल्यों में विश्वास नहीं है।

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