भाजपा ने मध्यप्रदेश में राज्यसभा चुनाव में अपना तीसरे उम्मीदवार की भी घोषणा कर दिया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने तीसरा उम्मीदवार खड़ा करने का फैसला काफी सोच समझ कर एवं मंथन करने के बाद खड़ा किया है स्वाभाविक है कि उनके संपर्क में कांग्रेस विधायक होंगे तभी वह इस प्रकार का निर्णय लिए है!
भाजपा द्वारा मध्यप्रदेश में राज्यसभा चुनाव के लिए अपना तीसरा उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद मध्य प्रदेश का रास चुनाव दिलचस्प हो गया है!
तीसरी सीट जीतने के लिए बीजेपी को कांग्रेस के कम से कम 8 विधायकों को तोड़ना होगा। कांग्रेस अपने विधायकों को हार्स ट्रेडिंग से बचाने के लिए तेलंगाना या कर्नाटक भेज सकती हैं। मीनाक्षी नटराजन तेलंगाना कांग्रेस की प्रभारी भी है इसलिए तेलंगाना कांग्रेस में जीतने के लिए कोई कसर छोड़ने वाली नहीं है।
कांग्रेस में आठ विधायकों का टूटना भी इतना आसान नहीं है,लेकिन कांग्रेस के पूर्व के इतिहास को देखते हुए यह मप्र की राजनीति में असंभव भी नहीं लगता हैं।

मप्र के राजनीतिक पंडितों का मानना है कि जब कांग्रेस का कोई बड़ा एक क्षत्रप पार्टी से बगावत करेगा तभी तीसरी सीट भारतीय जनता पार्टी जीत सकती है तो बड़ा सवाल यह है उठना है कि क्या कांग्रेस का कोई बड़ा क्षत्रप बगावत करने वाला है या भाजपा के संपर्क में है?
जैसे पूर्व में कांग्रेस के बड़े क्षत्रप रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बगावत की थी और कांग्रेस की सरकार को ध्वस्त कर दिया था!

अगर मोहन यादव अपना तीसरा उम्मीदवार जीताने में सफल हो गए तो वह मध्य प्रदेश की राजनीति के नए हीरो बन जाएंगे अगर वह असफल रहे वह कांग्रेस के लिए एक बार फिर से मध्य प्रदेश में नई उर्वरा भूमि को जन्म देंगे।




