मध्य प्रदेश में एमएसपी पर गेहूं खरीदी की प्रक्रिया एक बार फिर सवालों के घेरे में है। चिलचिलाती गर्मी में किसान खरीदी केंद्रों के बाहर घंटों खड़े हैं, लेकिन सिस्टम की लापरवाही उनकी मुश्किलें बढ़ा रही है। कहीं सर्वर बार-बार ठप हो रहा है तो कहीं स्लॉट बुकिंग ही नहीं हो पा रही, जिससे किसान अपना गेहूं बेचने के लिए दर-दर भटक रहा है।
इसी बीच कई जगहों से गड़बड़ियों की गंभीर खबरें सामने आई हैं। आरोप है कि राशन वितरण (पीडीएस) का पुराना गेहूं नई बोरियों में भरकर बेचा जा रहा है। इससे न सिर्फ सरकारी खरीदी प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं, बल्कि किसानों के साथ अन्याय भी हो रहा है।
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इस मुद्दे को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों का फायदा बिचौलियों को मिल रहा है, जबकि असली किसान परेशान होकर लाइन में खड़ा है। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर हर स्तर पर संघर्ष करने की बात कही है।
जांच के दौरान कई वेयरहाउस में चौंकाने वाली अनियमितताएं सामने आईं
- मां हरसिद्धि वेयरहाउस में पुराने पीडीएस गेहूं को नई बोरियों में भरकर बेचे जाने के प्रमाण मिले। करीब 105 बोरियों में तय मात्रा से ज्यादा गेहूं पाया गया, जिससे फर्जीवाड़े की आशंका बढ़ गई है।
- कार्तिक वेयरहाउस में गोदाम आधा भरा होने के बावजूद खरीदी जारी रही और क्षमता से ज्यादा गेहूं की एंट्री दर्ज की गई।
- सिद्धि विनायक वेयरहाउस में गोदाम भरने के बाद भी पास के दूसरे वेयरहाउस में बिना अनुमति खरीदी शुरू कर दी गई।
- आदर्श वेयरहाउस में तौल कांटों में गड़बड़ी पाई गई, जहां 50 किलो की बोरी का वजन कहीं 54 किलो तो कहीं 45 किलो दर्ज हो रहा था, जिससे किसानों में नाराजगी बढ़ गई।
किसानों का कहना है कि कई केंद्रों पर स्लॉट बुकिंग नहीं हो रही, लेकिन सिस्टम में उन्हें ‘फुल’ दिखाया जा रहा है। इससे साफ है कि जमीन पर स्थिति और रिकॉर्ड में बड़ा अंतर है।



