पुरी में भगवान जगन्नाथ की पारंपरिक ‘बहुड़ा यात्रा’ शनिवार को भव्य पहांडी अनुष्ठान के साथ आरंभ हुई। इस अवसर पर भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और भगवान जगन्नाथ को श्री गुंडिचा मंदिर से विधिवत रथों तक ले जाया गया। श्रद्धा और भक्ति के बीच तीनों देवताओं को तलध्वज, दर्पदलन और नंदीघोष रथों पर विराजमान कराया गया। यह वापसी यात्रा 2.6 किलोमीटर लंबी है, जो मुख्य श्रीमंदिर की ओर जाती है।
रथों को खींचने से पूर्व ‘मंगला आरती’ और ‘मैलम’ जैसे पारंपरिक अनुष्ठान किए गए। इसके पश्चात सुदर्शन चक्र को सबसे पहले रथ पर विराजमान किया गया, जिसके बाद क्रमशः भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और अंत में भगवान जगन्नाथ को रथों पर बैठाया गया।
पारंपरिक ‘छेरा पहनरा’ की रस्म गजपति महाराज दिव्यसिंह देब द्वारा निभाई गई, जिसमें वे झाड़ू लगाकर रथों की सफाई करते हैं। यह रस्म दोपहर 2:30 से 3:30 के बीच पूरी श्रद्धा से संपन्न हुई। शाम 4 बजे के बाद भक्तों ने रथों को खींचना आरंभ किया।
पिछली भगदड़ की घटना को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने इस बार सुरक्षा के विशेष प्रबंध किए हैं। करीब 6,000 पुलिस कर्मी और 800 सीएपीएफ जवानों की तैनाती की गई है। 275 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जो भीड़ पर नजर रखने के साथ किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे।
पुरी में लाखों श्रद्धालु रथयात्रा के पावन दृश्य को देखने के लिए पहुंचे हैं। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने लोगों को बहुड़ा यात्रा की शुभकामनाएं दी हैं।



