“भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैच पर भड़का विपक्ष: ‘शहीदों के खून पर क्रिकेट का तमाशा बंद हो'”

Madhya Bharat Desk
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नई दिल्ली।भारत-पाकिस्तान के बीच होने वाले आगामी क्रिकेट मैच को लेकर देश में नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। विपक्ष ने इस मैच के आयोजन पर आपत्ति जताते हुए खेलों में पाकिस्तान के पूर्ण बहिष्कार की मांग की है। यह विवाद उस समय और अधिक गहराया जब यह सामने आया कि यह मैच पहलगाम में हुए आतंकी हमले के महज कुछ महीने बाद खेला जा रहा है।

राजनीतिक दलों का विरोध:

शिवसेना (यूबीटी) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कड़े शब्दों में भारतीय क्रिकेट बोर्ड (BCCI) को आड़े हाथों लेते हुए कहा, “हम भारतीय पाकिस्तान के साथ किसी भी प्रकार की क्रिकेटिंग गतिविधि का विरोध करेंगे। यह मैच कहीं भी हो, इसका समर्थन नहीं किया जा सकता। भारतीय सेना और नागरिकों के खून पर मुनाफा कमाने की सोच तुरंत बंद होनी चाहिए।”

उन्होंने कहा कि एक ओर देश में ऑपरेशन सिंदूर जैसे सैन्य अभियान चल रहे हैं और दूसरी ओर बोर्ड राजस्व के लिए पाकिस्तान से खेल कर रहा है — यह दोहरा मापदंड नहीं चलेगा।

अन्य नेताओं की राय:

झारखंड के लोहरदगा से सांसद सुखदेव भगत ने भी इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए कहा, “पाकिस्तान की गतिविधियों ने देश की राष्ट्रीय भावना को गहरी ठेस पहुंचाई है। खेल को राजनीति से अलग रखने की बात करने वाले यह भूल जाते हैं कि जब सैनिक शहीद होते हैं, तब पूरा देश आहत होता है।”

पूर्व क्रिकेटर की संतुलित राय:

पूर्व भारतीय कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन ने एक संतुलित रुख अपनाते हुए कहा, “अगर भारत-पाक द्विपक्षीय सीरीज नहीं खेल रहा है, तो अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में भी यही नीति अपनाई जानी चाहिए। हालांकि अंतिम निर्णय सरकार और बोर्ड का होता है और हमें उस निर्णय का सम्मान करना चाहिए।”

हाल ही की घटनाएं:

गौरतलब है कि हाल ही में इंग्लैंड में आयोजित वर्ल्ड चैंपियनशिप ऑफ लीजेंड्स में भारत-पाक मैच को रद्द कर दिया गया था, क्योंकि कई दिग्गज भारतीय खिलाड़ियों जैसे हरभजन सिंह, इरफान पठान और शिखर धवन ने पहलगाम हमले का हवाला देते हुए मैच खेलने से इनकार कर दिया था।

भारत-पाकिस्तान के बीच क्रिकेट मैच हमेशा से भावनात्मक और राजनीतिक रूप से संवेदनशील रहा है, लेकिन जब देश आतंकवाद से पीड़ित हो और सैनिक बलदानी हो रहे हों, तब यह मुद्दा केवल खेल तक सीमित नहीं रह जाता।

अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सरकार इस विरोध को ध्यान में रखते हुए मैच पर पुनर्विचार करेगी, या फिर BCCI इसे केवल एक खेल की तरह देखकर आगे बढ़ेगा।

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