संसद के मौजूदा मानसून सत्र में विपक्षी INDIA ब्लॉक ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ग्यानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग (impeachment) प्रस्ताव लाने पर गंभीरता से विचार शुरू किया है। यह राजनीतिक उठापटक तब तेज हुई जब CEC ने विपक्षी नेता राहुल गांधी को ‘वोट चोरी’ संबंधी आरोपों पर या तो शपथ पत्र (affidavit) प्रस्तुत करने या देश से माफ़ी मांगने का विकल्प दिया।
विरोध की वजहें
मुख्य रूप से दो प्रमुख मुद्दों पर विपक्षी दलों की आक्रोशित प्रतिक्रिया रही:
बिहार में विशेष गहन शुद्धिकरण (Special Intensive Revision, SIR) के दौरान मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और जातिगत तरीके से चल रहे संशोधनों पर सवाल उठाना।
CEC द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस में पारदर्शिता का अभाव, और विपक्ष के सवालों का जवाब नहीं देना — जैसे मृतक व्यक्तियों के नाम सूची में बने रहना या लाइसेंस वाले नामों का हटना — को लेकर प्रतिशोधन करना।
महाभियोग की प्रक्रिया पर चर्चा
INDIA ब्लॉक की बैठक में, कांग्रेस प्रमुख व्हिप जयराम रमेश ने महाभियोग प्रस्ताव पर विचार उठाया। विपक्ष को विधायी दृष्टि से पर्याप्त समर्थन प्राप्त है, लेकिन प्रस्ताव को नेता की मंजूरी मिलना, और दोनों सदनों में पर्याप्त समर्थन जुटाना चुनौतीपूर्ण रह सकता है।
Moneycontrol के विश्लेषण के अनुसार, महाभियोग प्रस्ताव प्रस्तुत करने के लिए लोकसभा में कम-से-कम 100 और राज्यसभा में 50 हस्ताक्षर जरूरी हैं, और पारित होने के लिए दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत चाहिए।
विपक्ष की रणनीति और सार्वजनिक बयान
कांग्रेस के गौरव गोगोई ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट किया कि “हम सभी संसदीय और कानूनी विकल्प खुले रखेंगे” और निर्णय “उचित समय पर” लिया जाएगा।
RJD के मनोज कुमार झा ने कहा, “सभी विकल्प खुले हैं — कानूनी भी, संसदीय भी।”
TMC के अभिषेक बैनर्जी ने EC की भूमिका को “BJP की झुकाव वाली” करार देते हुए कहा कि वे अदालत और संसद दोनों जगह लड़ेंगे; साथ ही महाभियोग की संभावना पर विचार कर रहे हैं।
ध्यान देने योग्य है कि 2023 के “Chief Election Commissioner and Other Election Commissioners (Appointment, Conditions of Service and Term of Office) Act, 2023” के अनुसार, CEC को हटाने की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की तरह ही है — यानी महाभियोग याचिका पारित करनी होगी।
Moneycontrol ने बताया कि यह प्रक्रिया लोकसभा व राज्यसभा दोनों में बहुमत के आधार पर हो सकती है; लेकिन Chair (अध्यक्ष) द्वारा प्रस्ताव की स्वीकार्यता भी एक बड़ी बाधा हो सकती है।







