पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र, चैतन्या बघेल, को रायपुर की विशेष PMLA अदालत ने पांच दिन की ED रिमांड दी थी। यह कदम उस समय उठाया गया जब ED ने उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े एक बड़े RS. 2,100-करोड़ की शराब घोटाला (liquor scam) मामले में पूछताछ के उद्देश्य से हिरासत में लिया था। उनकी प्रथम रिमांड जेल की हिरासत अवधि में ही समाप्त हो गई है, और आज अदालत में फिर सुनवाई होगी कि उन्हें फिर से ED कस्टडी में लिया जाए या ज्यूडिशियल रिमांड की स्थिति बनी रहे।
पृष्ठभूमि और ED की दलीलें:
ED का आरोप है कि चैतन्या बघेल ने shell companies और अंडर-इनवॉइस्ड रीयल-एस्टेट लेनदेन के ज़रिये लगभग ₹16.70 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग की है। यह धन कथित तौर पर त्रुटिपूर्ण और नकद तरीके से उनकी परियोजना में लगाया गया, जिससे उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों का सामना करना पड़ा। विशेष रूप से, ₹5 करोड़ का भुगतान “Saheli Jewellers” के माध्यम से उनके प्रोजेक्ट “Vitthal Green” में किया गया, जहाँ वास्तविक खर्च ₹13–15 करोड़ बताया गया, जबकि रिकॉर्ड में केवल ₹7.14 करोड़ दिखाया गया।
रेमांड की प्रक्रिया व वर्तमान स्थिति:
चैतन्या बघेल को 18 जुलाई 2025 को गिरफ्तार किया गया था — जो कि उनके 38वें जन्मदिन पर हुआ — और उसी दिन ED रिमांड की मांग की गई थी। रायपुर की PMLA अदालत ने विशेष रूप से उन्हें 5-दिन की कस्टोडियल रिमांड की मंजूरी दी, जो 22 जुलाई तक लागू हुई।
अब, जैसा कि यह प्रारंभिक रिमांड पूरी हो चुकी है, अदालत में आज सुनवाई है — ED फिर से उन्हें अपनी कस्टोडी में लेने की मांग कर सकती है, या अदालत ज्यूडिशियल रिमांड को ही आगे बढ़ा सकती है।



