UGC के नए नियमों पर देश में बवाल, सुप्रीम कोर्ट में आज होगी अहम सुनवाई

Madhya Bharat Desk
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नई दिल्ली।विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा लागू किए गए नए नियमों को लेकर देशभर में विरोध की लहर तेज हो गई है। कई छात्र संगठनों और सामाजिक समूहों का आरोप है कि ये नियम सामान्य वर्ग के साथ भेदभाव को बढ़ावा देते हैं। इस मुद्दे पर अब सियासत भी गर्मा गई है और मामला सीधे सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है।

उत्तर प्रदेश में इन नियमों के विरोध में एक वरिष्ठ अधिकारी ने अपने पद से इस्तीफा देकर हलचल और बढ़ा दी है। इसी बीच, UGC के नए रेगुलेशन को चुनौती देने वाली याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होने जा रही है।

 सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई

UGC के नए नियमों के खिलाफ दाखिल याचिका पर बुधवार को तत्काल सुनवाई की मांग की गई थी, जिसे स्वीकार करते हुए मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने मामले को सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई। अब इस याचिका पर CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाला बागची की पीठ सुनवाई करेगी।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि नए नियमों से सामान्य वर्ग के छात्रों और कर्मचारियों के अधिकारों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। इस पर CJI ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अदालत को मौजूदा स्थिति की जानकारी है और खामियों को दूर करना जरूरी है।

 क्या हैं UGC के नए नियम?

13 जनवरी 2026 को अधिसूचित UGC (उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने) नियम, 2026 के तहत सभी विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों को ‘समानता समिति’ गठित करना अनिवार्य किया गया है।

इन समितियों में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), दिव्यांग और महिला प्रतिनिधि की भागीदारी अनिवार्य होगी। ये नए नियम वर्ष 2012 में लागू पुराने रेगुलेशन की जगह लेंगे।

 याचिका में क्या है आपत्ति?

याचिका में दावा किया गया है कि नए नियमों में जाति आधारित भेदभाव की परिभाषा केवल SC, ST और OBC तक सीमित कर दी गई है। इससे सामान्य या गैर-आरक्षित वर्ग के लोगों को संस्थागत सुरक्षा और शिकायत निवारण प्रणाली से वंचित किया गया है।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यदि सामान्य वर्ग के किसी व्यक्ति को उसकी जातिगत पहचान के आधार पर उत्पीड़न या भेदभाव झेलना पड़े, तो उसके लिए कोई स्पष्ट संरक्षण व्यवस्था नहीं छोड़ी गई है।

 मौलिक अधिकारों के उल्लंघन का आरोप

याचिका में यह भी कहा गया है कि UGC के ये नियम संविधान के अनुच्छेद 14 और 15(1) का उल्लंघन करते हैं, जो सभी नागरिकों को समानता और भेदभाव से मुक्ति का अधिकार देते हैं।

देश के कई हिस्सों में छात्र संगठन और सामाजिक संस्थाएं इन नियमों को वापस लेने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रही हैं। अब सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट की आज की सुनवाई पर टिकी हैं।

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