चार बार नाम आया, फिर भी IPS अफसर को नहीं मिला प्रमोशन, मुख्यमंत्री से मांगा इंसाफ

Madhya Bharat Desk
3 Min Read

कवर्धा।छत्तीसगढ़ पुलिस विभाग में पदोन्नति को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है। कबीरधाम जिले में पदस्थ पुलिस अधीक्षक और 2012 बैच के आईपीएस अधिकारी धर्मेंद्र सिंह छवई ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर अपने साथ हुए कथित भेदभाव पर सवाल उठाए हैं।

आईपीएस अधिकारी का कहना है कि उनके ही बैच के लगभग सभी अधिकारियों को डीआईजी पद पर पदोन्नत कर दिया गया, लेकिन चार बार नाम आने के बावजूद उन्हें इस प्रक्रिया से बाहर रखा गया। वर्तमान में वे कवर्धा जिले में एसपी के रूप में सेवाएं दे रहे हैं।

 चार सूचियों में नाम, फिर भी पदोन्नति से वंचित

धर्मेंद्र सिंह के अनुसार, पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी 10 अक्टूबर 2024, 31 दिसंबर 2024, 26 मई 2025 और 31 जुलाई 2025 की पदोन्नति सूचियों में उनके नाम पर विचार किया गया, लेकिन हर बार प्रमोशन रोक दिया गया। विभाग की ओर से इसका कारण उनके खिलाफ लोकायुक्त संगठन, भोपाल में लंबित जांच को बताया गया।

 न चार्जशीट, न जांच, न निलंबन

पत्र में आईपीएस अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि उनके खिलाफ अब तक

  • न कोई चार्जशीट जारी हुई है
  • न कोई विभागीय जांच चल रही है
  • और न ही वे निलंबित हैं

इसके बावजूद केवल जांच लंबित होने के आधार पर प्रमोशन रोकना नियमों के विपरीत बताया गया है।

 गंभीर मामलों वाले अफसरों को मिली तरक्की

धर्मेंद्र सिंह ने यह भी आरोप लगाया है कि कई ऐसे अधिकारी, जिनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत गंभीर मामले दर्ज हैं, उन्हें पदोन्नति दी गई। जबकि उनके मामले में अब तक कोई कानूनी प्रक्रिया पूरी भी नहीं हुई है।

 गृह मंत्रालय के नियमों का हवाला

पत्र में भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा 15 जनवरी 1999 को जारी दिशा-निर्देशों का उल्लेख किया गया है। इन नियमों के अनुसार, यदि कोई अधिकारी निलंबित नहीं है, उसके खिलाफ आरोप पत्र दाखिल नहीं हुआ है और अदालत में कोई आपराधिक मामला लंबित नहीं है, तो उसे पदोन्नति से रोका नहीं जा सकता।

 संविधान के अनुच्छेद-16 के उल्लंघन का दावा

आईपीएस अधिकारी ने पूरे मामले को भारतीय संविधान के अनुच्छेद-16 (समान अवसर का अधिकार) का उल्लंघन बताया है। उनका कहना है कि समान परिस्थितियों में अन्य अधिकारियों को प्रमोशन दिया गया, जबकि उनके साथ अलग व्यवहार किया गया, जिससे उनका मनोबल प्रभावित हुआ है।

 प्रमोशन प्रक्रिया पर उठे सवाल

पत्र के सामने आने के बाद छत्तीसगढ़ पुलिस विभाग की पदोन्नति प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो गए हैं। अब निगाहें मुख्यमंत्री और राज्य सरकार पर टिकी हैं कि इस मामले में क्या निर्णय लिया जाता है और क्या एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी को न्याय मिल पाएगा।

Share on WhatsApp

Share This Article
Leave a Comment