रायपुर। छत्तीसगढ़ में जेम पोर्टल से होने वाली सरकारी निविदाओं की पारदर्शिता एक बार फिर कठघरे में है। सवाल यह नहीं है कि टेंडर में गड़बड़ी हुई या नहीं, सवाल यह है कि क्या टेंडर खुलने से पहले ही यह तय कर लिया गया था कि काम किस कंपनी को मिलना है। बालोद जिले में प्रस्तावित नेशनल लेवल रोवर-रेंजर जंबूरी 2026 के आयोजन को लेकर सामने आए हालात इसी ओर इशारा कर रहे हैं।
जानकारी के अनुसार जंबूरी आयोजन का टेंडर 20 दिसंबर की शाम 5:30 बजे जेम पोर्टल पर खुलना था, लेकिन इससे पहले ही आयोजन स्थल शासकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज बालोद में एक निजी कंपनी ने काम शुरू कर दिया। मौके पर कंपनी के ट्रक, सामग्री और श्रमिकों की मौजूदगी ने यह साफ कर दिया कि काम पूरी तैयारी के साथ शुरू हो चुका है। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि जब टेंडर प्रक्रिया पूरी ही नहीं हुई थी, तो कंपनी को किसके आदेश पर काम शुरू करने की छूट मिली।
यह भी सवाल उठ रहा है कि जेम पोर्टल जैसी ऑनलाइन और कथित तौर पर पारदर्शी प्रणाली के बावजूद टेंडर की जानकारी पहले ही कैसे लीक हो गई। क्या टेंडर खुलने से पहले ही अधिकारियों ने कंपनी को यह भरोसा दे दिया था कि काम उसी को मिलेगा। यदि ऐसा है, तो फिर नियमों का पालन करते हुए टेंडर खुलने का इंतजार करने वाले अन्य निविदाकर्ताओं का क्या कसूर था और उनके साथ हुए संभावित नुकसान की भरपाई कौन करेगा।
मामले को और संदिग्ध तब बना दिया जब टेंडर दस्तावेज में दिए गए संबंधित अधिकारी के मोबाइल नंबर पर संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन तय समय पर फोन स्विच ऑफ मिला। सवाल यह भी है कि क्या अधिकारी जवाबदेही से बचने के लिए जानबूझकर संपर्क से दूर रहे। पूरे घटनाक्रम में बड़े पैमाने पर लेन-देन और पूर्व-निर्धारित ठेके की चर्चा भी सामने आ रही है।
जंबूरी का आयोजन 9 से 13 जनवरी तक होना प्रस्तावित है और इसकी जिम्मेदारी स्कूल शिक्षा विभाग से जुड़ी हुई है। ऐसे में विभागीय अधिकारियों की भूमिका पर भी उंगलियां उठ रही हैं। क्या विभाग के अधिकारियों ने नियमों को दरकिनार कर कंपनी को पहले ही काम सौंप दिया। और अगर ऐसा हुआ है, तो क्या यह बिना राजनीतिक संरक्षण के संभव था।
अब इस पूरे मामले में स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव की भूमिका को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। क्या मंत्री स्तर पर जानकारी होने के बावजूद आंखें मूंद ली गईं, या फिर अधिकारियों और कंपनी के बीच बनी साठगांठ को मौन सहमति दी गई। क्या इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होगी या फिर यह मामला भी फाइलों में दबा दिया जाएगा।
बालोद से उठा यह मामला केवल एक आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रदेश की टेंडर प्रक्रिया की सच्चाई को उजागर करता है। सवाल यह है कि क्या सरकार इस मामले में सिर्फ बयानबाजी करेगी या फिर जेम पोर्टल के जरिए होने वाले टेंडरों में जारी इस कथित खेल पर लगाम लगाने के लिए ठोस कार्रवाई करेगी।
देखें टेंडर फाइल
https://drive.google.com/file/d/1tG4U7DGFAenWsg9xqISZR_bxcXpjeTmW/view?usp=drivesdk
https://drive.google.com/file/d/1v3CXwnLf6DAczk7mQr-DUidZNdj1gfM8/view?usp=drivesdk
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