साड़ी घोटाला: चोर के हाथ में ही तिजोरी की चाबी? छत्तीसगढ़ साड़ी कांड में आरोपी ही बना जांच कमेटी का अध्यक्ष!

Madhya Bharat Desk
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रायपुर: छत्तीसगढ़ के महिला एवं बाल विकास विभाग में भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी हो चुकी हैं कि अब खुद सरकार की नीयत पर सवाल उठ रहे हैं। विभाग में करोड़ों की साड़ी खरीदी में हुई धांधली को दबाने के लिए जिस ‘जांच कमेटी’ का गठन किया गया है, उसकी संरचना ने सुशासन के दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं।

*‘लीपापोती’ का मास्टरप्लान*

खुद ही आरोपी, खुद ही जज

सबसे हैरान करने वाला तथ्य यह है कि दिलदाल सिंह मरावी, जो विवादित खरीदी कमेटी के महत्वपूर्ण सदस्य रहे हैं, उन्हें ही इस भ्रष्टाचार की जांच कमेटी का अध्यक्ष नियुक्त कर दिया गया है।

सवाल यह उठता है कि जो व्यक्ति खुद खरीदी प्रक्रिया में शामिल था, वह अपनी ही गलतियों के खिलाफ रिपोर्ट कैसे तैयार करेगा? क्या यह सीधे तौर पर दोषियों को क्लीन चिट देने की सोची-समझी साजिश है?

*रसूखदारों का ‘सुरक्षा घेरा’*

शम्मी आबिदी और रूही तेंदुलकर संदेह के घेरे में

इस घोटाले की आंच सिर्फ निचले स्तर तक सीमित नहीं है। विभाग की सेक्रेटरी शम्मी आबिदी और महिला बाल विकास मंत्री लक्ष्मी रजवाड़े की OSD रूही तेंदुलकर की भूमिका को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आरोप हैं कि:

मंत्री कार्यालय और सचिवालय के संरक्षण में ही घटिया साड़ियों की सप्लाई को मंजूरी दी गई।

रसूखदारों को बचाने के लिए उच्च स्तरीय जांच (EOW या न्यायिक जांच) के बजाय विभाग के भीतर ही ‘दिखावटी’ कमेटी बनाई गई।

साय सरकार की साख पर बट्टा

विष्णुदेव साय सरकार एक तरफ भ्रष्टाचार पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ महिला एवं बाल विकास विभाग में खुलेआम हो रही इस खानापूर्ति ने सरकार को बैकफुट पर ला दिया है।

17 अप्रैल 2026 को गठित 5 सदस्यीय कमेटी की वैधता अब शून्य नजर आ रही है।

जनता पूछ रही है—क्या विष्णुदेव सरकार में भ्रष्टाचारियों को संरक्षण मिल रहा है?

*उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच की आवश्यकता*

जिस तरह से खरीदी कमेटी के सदस्यों को ही जांच का जिम्मा सौंपा गया है, उससे यह साफ है कि विभाग अपनी साख बचाने के लिए तथ्यों को दफन करना चाहता है। अब मांग उठ रही है कि दिलदाल सिंह मरावी को तुरंत जांच कमेटी से हटाया जाए।

सेक्रेटरी और OSD की भूमिका की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए।

मुख्यमंत्री साय तत्काल हस्तक्षेप करें, वरना ‘भ्रष्टाचार के खात्मे’ का उनका संकल्प केवल एक चुनावी जुमला बनकर रह जाएगा।

*बड़ा सवाल*

क्या मुख्यमंत्री इस खुली ‘लीपापोती’ पर संज्ञान लेकर कमेटी को भंग करेंगे, या फिर यह घोटाला भी फाइलों के नीचे दबा दिया जाएगा?

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