पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब भारत के चुनावी माहौल पर भी साफ दिखाई देने लगा है। ईरान-इस्राइल तनाव के चलते खाड़ी देशों में रहने वाले केरल के हजारों प्रवासी मतदाता इस समय चिंता में हैं। उन्हें समझ नहीं आ रहा कि वे 9 अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनाव में वोट डालने के लिए समय पर घर पहुंच पाएंगे या नहीं।
उड़ानों में बाधा, बढ़ी मुश्किलें
मौजूदा हालात की वजह से कई देशों ने अपना हवाई क्षेत्र आंशिक या पूरी तरह बंद कर दिया है। इसका सीधा असर दुबई, अबू धाबी और दोहा जैसे बड़े एयर हब पर पड़ा है।
कई फ्लाइट्स रद्द हो चुकी हैं, जबकि जो उड़ानें चल रही हैं उनमें देरी आम बात हो गई है। ऐसे में टिकट मिलना मुश्किल और महंगा दोनों हो गया है।
‘वोट फ्लाइट’ परंपरा को लगा झटका
केरल में चुनाव के समय “वोट फ्लाइट” की एक खास परंपरा रही है, जहां संगठन प्रवासी मतदाताओं को खास विमानों से घर लाते हैं।
केरल मुस्लिम कल्चरल सेंटर और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग जैसे संगठन इसमें अहम भूमिका निभाते रहे हैं।
लेकिन इस बार हालात अलग हैं। अनिश्चित उड़ानों और सुरक्षा चिंताओं के चलते इन विशेष विमानों का इंतजाम करना आसान नहीं रह गया है।
नेताओं की चिंता
आईयूएमएल के नेता सैयद मुनव्वर अली शिहाब थंगल ने कहा कि मौजूदा हालात बेहद चुनौतीपूर्ण हैं।
उन्होंने उम्मीद जताई कि स्थिति जल्द सामान्य होगी, लेकिन फिलहाल कोई स्पष्टता नहीं है।
महंगे टिकट बने बड़ी बाधा
यूएई और सऊदी अरब में रहने वाले प्रवासियों के लिए एक और बड़ी समस्या है—हवाई टिकट की कीमत।
टिकट इतने महंगे हो गए हैं कि आम कामगार के लिए आना-जाना मुश्किल हो गया है।
चार्टर्ड फ्लाइट की योजना जरूर बन रही है, लेकिन उसका फायदा सीमित लोगों तक ही पहुंच पाएगा। ज्यादातर प्रवासियों के पास न तो लंबी छुट्टी है और न ही इतना बजट।
रिमोट वोटिंग की मांग तेज
इस पूरी स्थिति ने एक बार फिर “रिमोट वोटिंग” की मांग को हवा दे दी है।
प्रवासी मतदाताओं का कहना है कि लाखों लोग सिर्फ दूरी और खर्च की वजह से अपने मतदान के अधिकार का इस्तेमाल नहीं कर पाते।
वे चाहते हैं कि भारत भी उन देशों की तरह व्यवस्था बनाए, जहां नागरिक विदेश में रहते हुए भी वोट डाल सकते हैं।







