रायपुर/नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बस्तर संभाग में नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षा रणनीति के साथ-साथ विकास और जन-कल्याण को लेकर एक ऐतिहासिक घोषणा की है। गृह मंत्री ने कहा कि बस्तर में तैनात सुरक्षा बलों के 200 कैंपों में से 70 कैंपों को ‘वीर शहीद गुंडाधुर सेवा डेरा’ के रूप में तब्दील किया जाएगा।
इन सेवा केंद्रों के माध्यम से बस्तर के सुदूर और संवेदनशील इलाकों के ग्रामीणों तक शासन की तमाम मूलभूत सुविधाएं सीधे पहुंचाई जाएंगी।
कैंपों में मिलेंगी शिक्षा, स्वास्थ्य और बैंकिंग जैसी सभी सुविधाएं
गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया कि इन सेवा डेरों का मुख्य उद्देश्य स्थानीय आदिवासियों और ग्रामीणों के जीवन स्तर को सुधारना और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ना है।
इन केंद्रों में निम्नलिखित सुविधाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराई जाएंगी:
शिक्षा और आंगनबाड़ी: बच्चों के लिए पढ़ाई और पोषण की व्यवस्था।
स्वास्थ्य सेवाएं: प्राथमिक उपचार, दवाइयां और स्वास्थ्य जांच की सुविधाएं।
डिजिटल सेवा और बैंकिंग:ग्रामीणों को डिजिटल साक्षर बनाने और बैंकिंग लेन-देन (ATM व आधार इनेबल्ड पेमेंट) की सुविधा।
अन्य सरकारी योजनाएं: राज्य और केंद्र सरकार की सभी जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ।
“भारत और छत्तीसगढ़ सरकार आपके साथ हैं।”
— अमित शाह, केंद्रीय गृह मंत्री
क्यों खास है ‘वीर शहीद गुंडाधुर’ का नाम?
बस्तर के महान क्रांतिकारी और 1910 के प्रसिद्ध ‘भूमकाल आंदोलन’ के जननायक शहीद गुंडाधुर के नाम पर इन सेवा केंद्रों का नामकरण किया गया है। यह फैसला स्थानीय संस्कृति, अस्मिता और स्वतंत्रता संग्राम के नायकों के प्रति सम्मान को दर्शाता है।
बदलती बस्तर की तस्वीर
सुरक्षा बलों के कैंपों को सेवा केंद्रों में बदलने का यह कदम यह दिखाता है कि सरकार अब बस्तर में केवल ‘सुरक्षा’ ही नहीं, बल्कि ‘विकास और विश्वास’ के मॉडल पर काम कर रही है। जिन इलाकों में कभी गोलियों की गूंज हुआ करती थी, अब वहां शिक्षा, स्वास्थ्य और डिजिटल क्रांति के जरिए विकास का नया सवेरा होने जा रहा है।
छत्तीसगढ़ सरकार और केंद्र सरकार मिलकर बस्तर के अंदरूनी इलाकों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।







