छत्तीसगढ़ के पाटन इलाके में वन विभाग एक बार फिर विवादों में घिर गया है। विभाग के कुछ कर्मचारियों पर लकड़ी ले जा रहे एक किसान से रिश्वत मांगने का आरोप लगा है। मामला सामने आते ही ग्रामीणों में नाराज़गी बढ़ गई है और लोग वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक, एक किसान जलाऊ लकड़ी लेकर जा रहा था। इसी दौरान वन विभाग की टीम ने उसकी गाड़ी रोक ली। आरोप है कि गाड़ी छोड़ने के बदले किसान से 8 हजार रुपये मांगे गए।
ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग छोटे किसानों पर सख्ती दिखाता है, जबकि बड़े लकड़ी तस्करों पर मेहरबानी बरती जाती है। गांव वालों का आरोप है कि इलाके में खुलेआम बड़ी मात्रा में लकड़ी काटकर रखी गई है, लेकिन तस्करों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो रही।
लोगों का कहना है कि प्रदेश में आए दिन लकड़ी तस्करी के मामले सामने आते रहते हैं, ऐसे में पाटन का यह मामला वन विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
वहीं वन विभाग के एक अधिकारी ने सफाई देते हुए कहा कि किसान की गाड़ी में प्रतिबंधित अर्जुनी लकड़ी और जलाऊ लकड़ी मिली थी, इसलिए नियमानुसार कार्रवाई की गई। अधिकारी ने रिश्वत के आरोपों पर कहा कि अगर 8 हजार रुपये मांगने का कोई सबूत सामने आता है तो जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल शिकायतकर्ता की ओर से कोई साक्ष्य पेश नहीं किया गया है।






