पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लगातार दो पोस्ट साझा करते हुए धीरेंद्र शास्त्री को प्रदेश के मठों और मंदिरों में निवास करने वाले साधु-महात्माओं के साथ शास्त्रार्थ करने की खुली चुनौती दी।
भूपेश बघेल ने अपने पहले पोस्ट में लिखा कि यदि धीरेंद्र शास्त्री स्वयं को सनातन धर्म का ज्ञाता मानते हैं, तो उन्हें राज्य के विद्वान संतों के साथ शास्त्रार्थ कर अपनी विद्वता सिद्ध करनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि बिना किसी मान्यता प्राप्त पीठ के वे किस आधार पर स्वयं को धर्म का प्रतिनिधि बताते हैं।
धीरेंद्र शास्त्री को चुनौती!
— Bhupesh Baghel (@bhupeshbaghel) December 26, 2025
धीरेन्द्र शास्त्री भाजपा के एजेंट के रूप में काम करते हैं, यही उनका धंधा है.
मैं उन्हें चुनौती देता हूं, हमारे छत्तीसगढ़ में बड़े महापुरुष हैं, शास्त्री जी हमारे मठ-मंदिरों में बैठे साधु-महात्माओं के साथ शास्त्रार्थ कर के दिखाएं. pic.twitter.com/yHv8jsLaNZ
दूसरे पोस्ट में भूपेश बघेल ने कहा कि वे स्वयं उस परंपरा से आते हैं जहां उनके जन्म से पहले से ही हनुमान चालीसा और बजरंग बाण का पाठ होता रहा है। ऐसे में कोई उन्हें सनातन धर्म की परिभाषा नहीं सिखा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि उनके ससुराल पक्ष में कई साधु हैं, लेकिन वे किसी प्रकार के ढोंग या पाखंड से दूर रहते हैं।
जब धीरेन्द्र शास्त्री का जन्म नहीं हुआ था तब से हम हनुमान चालीसा, बजरंग बाण पढ़ रहे हैं.
— Bhupesh Baghel (@bhupeshbaghel) December 26, 2025
वो हमें सिखाएंगे सनातन धर्म क्या है?
मेरे ससुराल में ही 5 साधु हैं, इनके तरह ढोंगी नहीं हैं. pic.twitter.com/2uJXnWkXBN
इस पूरे मामले में प्रदेश कांग्रेस के संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने भी राज्य सरकार पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि धीरेंद्र शास्त्री को राज्य सरकार द्वारा विमान भेजना सरकारी खजाने के दुरुपयोग की श्रेणी में आता है। उन्होंने पूछा कि किस संवैधानिक अधिकार के तहत उनके लिए सरकारी विमान की व्यवस्था की गई।
सुशील आनंद शुक्ला ने यह भी कहा कि धीरेंद्र शास्त्री एक कथावाचक हो सकते हैं, लेकिन वे न तो किसी मान्यता प्राप्त शास्त्रीय पीठ के पीठाधीश्वर हैं और न ही हिंदू समाज के सर्वमान्य धर्मगुरु। उन्होंने आरोप लगाया कि धीरेंद्र शास्त्री का आचरण और वक्तव्य देश की गंगा-जमुनी तहज़ीब के विपरीत है।
कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि सनातन धर्म का मूल स्वभाव समाज को जोड़ने का है, जबकि धीरेंद्र शास्त्री के वक्तव्यों से समाज में वैमनस्य और विभाजन को बढ़ावा मिलता है। इसी कारण कांग्रेस पार्टी उनके विचारों और भूमिका पर लगातार सवाल उठा रही है।







