बिलासपुर:छत्तीसगढ़ के चर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड में एक बार फिर कानूनी हलचल तेज हो गई है। लंबे समय से सुर्खियों में रहने वाले इस मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए अमित जोगी को तीन सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का निर्देश दिया है।
चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह आदेश पारित किया। इस फैसले के बाद करीब दो दशक पुराने इस केस में एक नया मोड़ आ गया है और राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा तेज हो गई है।
यह मामला 4 जून 2003 का है, जब रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उस वक्त यह घटना पूरे प्रदेश में सनसनी बन गई थी। जग्गी नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (NCP) के नेता और कोषाध्यक्ष थे।
राजनीतिक दृष्टि से भी यह मामला काफी संवेदनशील रहा है। जग्गी को पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल का करीबी माना जाता था, जिसके चलते इस हत्याकांड ने उस समय बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया था।
अब हाईकोर्ट के ताजा आदेश के बाद एक बार फिर यह केस चर्चा के केंद्र में है। सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में कानूनी प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ती है और इस हाई-प्रोफाइल मामले में क्या नया खुलासा सामने आता है।







