मध्य प्रदेश में इस समय किसान अपनी मेहनत की कमाई यानी गेहूं की फसल के साथ मंडियों की ओर देख रहे हैं, लेकिन सरकार की तैयारी अधूरी नजर आ रही है। राज्य में गेहूं की सरकारी खरीदी 1 अप्रैल से शुरू होनी थी, मगर अब इसे आगे बढ़ा दिया गया है।
सरकार ने नए आदेश में बताया है कि कुछ संभागों में 10 अप्रैल से और बाकी जगहों पर 15 अप्रैल से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदी शुरू होगी। इस फैसले ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि फसल तैयार होने के बावजूद उन्हें इंतजार करना पड़ रहा है।
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इस मुद्दे पर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि खरीदी में देरी से किसान मजबूर होकर अपनी उपज कम कीमत पर बिचौलियों को बेचने के लिए विवश हो जाएंगे।
कमलनाथ ने सरकार की तैयारियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि गेहूं खरीदी की तारीख आगे बढ़ाने का कारण “खाली बोरियों की कमी” बताया जा रहा है, जो प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है। उनके अनुसार, यह स्थिति साफ करती है कि किसानों की समस्याएं सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल नहीं हैं।
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश देश के प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों में से एक है। ऐसे में खरीदी प्रक्रिया में देरी का सीधा असर लाखों किसानों की आर्थिक स्थिति पर पड़ सकता है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार तय तारीखों पर सुचारू तरीके से खरीदी शुरू कर पाती है या नहीं।




