भारत क्या सचमुच बदल गया है ? मोदी योगी के सत्ता में आते ही क्यों थम गया भ्रष्टाचार

Madhya Bharat Desk
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भारतीय राजनीति और समाज में वह ऐतिहासिक परिवर्तन देखने को मिल रहा है, जिसका सपना जनता ने दशकों से देखा था। लंबे समय तक राजनीति में बाहुबलियों, माफिया सरगनाओं और वंशवादी परिवारों का दबदबा रहा, लेकिन अब परिस्थितियाँ पूरी तरह बदल चुकी हैं। जिन मुद्दों पर कभी आम लोग खुलकर बात नहीं कर पाते थे, वे अब समाज और राजनीति की मुख्य धारा में चर्चा का हिस्सा बन गए हैं।

1. माफिया और बाहुबलियों का खात्मा

योगी आदित्यनाथ की सरकार ने उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता बनाते हुए संगठित अपराध और माफिया गतिविधियों पर सीधा प्रहार किया।

  • अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी जैसे कुख्यात बाहुबलियों का दबदबा खत्म कर दिया गया। एक दौर था जब ये अपराधी खुद को कानून से ऊपर मानते थे और उनकी सत्ता शासन में दखल देती थी। लेकिन योगी सरकार ने उनकी अवैध संपत्तियाँ जब्त कर दीं और उनके अपराधी नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया।
  • महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई, जो कभी अंडरवर्ल्ड का गढ़ मानी जाती थी, वहाँ भी अब नया माफिया खड़ा नहीं हो पाया। कांग्रेस शासन के समय हाजी मस्तान और दाऊद इब्राहिम जैसे गैंगस्टर सत्ता और तंत्र पर हावी थे, लेकिन मोदी सरकार के दौर में उनका असर समाप्त हो चुका है और अब वैसा माहौल नहीं दिखता।

2. वंशवाद पर रोक

भारत की राजनीति में लंबे समय से कुछ परिवारों का वर्चस्व रहा है। सत्ता और राजनीति का सीधा लाभ उनके निजी आर्थिक साम्राज्य को मजबूत करने में होता था। लेकिन मोदी-योगी सरकार के बाद इस परिदृश्य में बदलाव आया है।

  • रॉबर्ट वाड्रा और पी. चिदंबरम से जुड़े विवादों की खबरें अब बहुत कम देखने को मिलती हैं। यह संकेत है कि अब सत्ता के गलियारों में पहले जैसी अंदरूनी ‘डीलिंग’ और विशेष संरक्षण नहीं बचा।
  • पहले नेताओं के निजी शौक और विलासिता पर जनता का पैसा पानी की तरह बहाया जाता था। मायावती के हीरों से सजे जन्मदिन, अखिलेश यादव के सैफई महोत्सव, प्रियंका गांधी की करोड़ों की पेंटिंग और ए.के. एंटनी की पत्नी की महंगी कलाकृतियाँ जैसे उदाहरण अब जनता की आँखों से ओझल हो चुके हैं।
  • यहाँ तक कि सोनिया गांधी की कथित ‘अज्ञात बीमारी’ के नाम पर होने वाले विदेश दौरे भी 2014 के बाद रुक गए, जिससे सरकारी खर्च में भी कमी आई।

3. भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार

मोदी सरकार ने अपने शासनकाल की सबसे बड़ी ताकत भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस को बनाया। यही नीति उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने भी अपनाई।

  • पहले नेताओं की संपत्तियों से जुड़ी अविश्वसनीय आय और अज्ञात स्रोतों की कमाई की खबरें आए दिन सुर्खियों में रहती थीं। उदाहरण के तौर पर, सुप्रिया सुले की जमीन से 670 करोड़ की फसल उगने जैसी खबरें सामने आती थीं। लेकिन अब इस तरह की घटनाएँ लगभग खत्म हो चुकी हैं।
  • सत्ता के संरक्षण में सरकारी नीतियों और संसाधनों के दुरुपयोग पर सख्त लगाम लगाई गई है। अब पारदर्शिता को बढ़ावा दिया जा रहा है और जनता को भरोसा दिलाया जा रहा है कि शासन तंत्र किसी भी तरह के भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं करेगा।

मोदी-योगी सरकार के नेतृत्व में आज भारत एक नई दिशा की ओर बढ़ रहा है। जहाँ कभी गुंडाराज, वंशवाद और भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी थीं, वहाँ अब कड़ी कार्रवाई, पारदर्शिता और ईमानदारी की नींव डाली जा रही है।

यह साबित हो चुका है कि मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति और कड़े फैसले न केवल अपराधियों और भ्रष्टाचारियों की दुकान बंद कर सकते हैं, बल्कि राजनीति को जनता की सेवा और विकास का वास्तविक माध्यम बना सकते हैं।

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