पश्चिम बंगाल में एक बार फिर महिला सुरक्षा को लेकर राजनीतिक घमासान तेज़ हो गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सरकार की उस योजना पर तीखी बहस छिड़ गई है, जिसमें बलात्कार पीड़िताओं को आर्थिक सहायता देने का प्रावधान है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार अपराध रोकने के बजाय मुआवज़े की घोषणा करके अपनी जिम्मेदारी से बच रही है।
दरअसल, राज्य सरकार की योजना के तहत यौन अपराध की शिकार महिलाओं को 10 लाख रुपये तक का मुआवज़ा देने का प्रावधान किया गया है। इस पर सवाल उठाते हुए विपक्षी दलों का कहना है कि “क्या मुआवज़ा देकर सरकार यह मान रही है कि अपराध होना तय है?”
राजनीतिक हलकों में यह बयान आग की तरह फैल गया कि “अगर रेप होगा तो 10 लाख मिलेंगे”, जिसे लेकर सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। विपक्ष का दावा है कि इस तरह की योजनाएं अपराधियों में डर पैदा करने के बजाय, शासन की विफलता को ढकने का माध्यम बन रही हैं।
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सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि मुआवज़ा जरूरी है, लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी है कानून का सख़्त पालन, त्वरित न्याय और अपराधियों में भय। सवाल यह भी है कि क्या केवल आर्थिक सहायता महिलाओं को सुरक्षित बना सकती है?
बंगाल की राजनीति में यह मुद्दा अब केवल महिला सुरक्षा का नहीं, बल्कि सरकार की संवेदनशीलता और प्रशासनिक जवाबदेही का प्रतीक बन चुका है। आने वाले दिनों में यह विवाद और गहराने की संभावना है।



