बालोद में धान परिवहन क्यों रुका? जिले के चारों फड़ों में अव्यवस्था, जिम्मेदार कौन?

Madhya Bharat Desk
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बालोद। जिले में धान परिवहन व्यवस्था लगातार चरमराती जा रही है। मालीघोरी फड़ के बाद अब जगतरा फड़ में भी परिवहन कार्य बुरी तरह बाधित हो गया है। हालात ऐसे बनते जा रहे हैं कि आने वाले दिनों में धोबनपुरी और फंडा फड़ पर भी परिवहन पूरी तरह ठप होने की आशंका है। इससे जिले के चारों धान संग्रहण केंद्रों पर संकट गहराता जा रहा है।

स्थानीय हालात पर नजर डालें तो प्रशासनिक उदासीनता खुलकर सामने आ रही है। स्थानीय अधिकारी ऊपर से आदेश न मिलने का बहाना बनाकर हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं, जबकि किसान, मजदूर और परिवहनकर्ता दर-दर भटकने को मजबूर हैं।

परिवहन कर्ताओं का कहना है कि वे लगातार जिला विपणन अधिकारी (डीएमओ) से संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन फोन तक नहीं उठाया जा रहा। हालात यह हैं कि समस्याओं को सुनने और समाधान निकालने वाला कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर मौजूद नहीं है।

जिले में कुल चार धान संग्रहण केंद्र हैं, जिनमें से दो पहले ही बंद हो चुके हैं। मौजूदा हालात को देखते हुए बाकी दो केंद्रों के भी बंद होने का खतरा मंडरा रहा है। इसके बावजूद कोई आला अधिकारी स्थिति की गंभीरता पर ध्यान नहीं दे रहा।

 मालीघोरी संग्रहण केंद्र पर हड़ताल

मालीघोरी धान संग्रहण केंद्र में हालात और भी चिंताजनक हैं। यहां कर्मचारी हड़ताल पर हैं, जिसके चलते दर्जनों धान से भरी गाड़ियां पिछले एक दिन से अधिक समय से खाली नहीं हो पाई हैं। आरोप है कि यहां बिना टेंडर के काम कराया जा रहा है, जिससे अव्यवस्था और बढ़ गई है।

कर्मचारियों का कहना है कि वेतन भुगतान को लेकर उन्होंने कई बार डीएमओ को अवगत कराया, लेकिन हर बार सिर्फ खोखले आश्वासन ही मिले। जब भुगतान की मांग को लेकर दबाव बनाया गया तो डीएमओ की ओर से “काम करना है तो करो, नहीं तो जाओ” जैसा गैर-जिम्मेदाराना जवाब दिया गया, जो किसी भी संवेदनशील प्रशासनिक अधिकारी को शोभा नहीं देता।

 किसान-मजदूर और परिवहनकर्ता सबसे ज्यादा प्रभावित

अधिकारियों की इस उदासीनता का सीधा असर किसानों की फसल, मजदूरों की रोजी और परिवहन व्यवसायियों के रोजगार पर पड़ रहा है। सभी वर्ग परेशान होकर इधर-उधर भटक रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस और सकारात्मक निर्णय सामने नहीं आया है।

अगर जल्द ही प्रशासन ने स्थिति को नहीं संभाला, तो जिले में धान खरीदी और परिवहन व्यवस्था पूरी तरह ठप हो सकती है।

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