छत्तीसगढ़ का मोस्ट वांटेड माओवादी नेता बारसे देवा ने डाला हथियार, 50 लाख का था इनामी

Madhya Bharat Desk
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नक्सल विरोधी अभियान में सुरक्षाबलों को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। छत्तीसगढ़ का कुख्यात माओवादी नेता बारसे देवा उर्फ सुक्का ने तेलंगाना में पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया है। बारसे देवा पर 50 लाख रुपये का इनाम घोषित था और वह माओवादी संगठन के शीर्ष नेतृत्व में शामिल रहा है। फिलहाल वह तेलंगाना पुलिस की हिरासत में बताया जा रहा है, हालांकि इस पर अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

छत्तीसगढ़ पुलिस ने जताई पुष्टि की संभावना

छत्तीसगढ़ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अगले एक-दो दिनों में इस संबंध में औपचारिक जानकारी साझा की जा सकती है। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक विवेकानंद सिन्हा ने बताया कि प्रारंभिक सूचना के अनुसार बारसे देवा इस समय तेलंगाना पुलिस के पास है।

हिड़मा एनकाउंटर के बाद तेज हुआ फैसला

पुलिस सूत्रों के मुताबिक बारसे देवा लंबे समय से आत्मसमर्पण को लेकर मंथन कर रहा था। छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना—चारों राज्यों की पुलिस से उसने मध्यस्थों के जरिए संपर्क साधा था। कुख्यात नक्सली कमांडर माडवी हिड़मा के एनकाउंटर के बाद उसके भीतर भय और अनिश्चितता और बढ़ गई, जिसके बाद आत्मसमर्पण की प्रक्रिया तेज हो गई।

डेढ़ दशक तक रहा हिड़मा का करीबी

सुकमा जिले के पुवर्थी गांव का निवासी बारसे देवा करीब 15 वर्षों तक हिड़मा के साथ सक्रिय रहा। हिड़मा के पीएलजीए की प्रथम बटालियन से सेंट्रल कमेटी में पदोन्नत होने के बाद उसकी कई सैन्य जिम्मेदारियां बारसे देवा को सौंपी गई थीं। बाद में उसे स्टेट मिलिट्री कमीशन का भी अहम पद दिया गया।

कई बड़े हमलों में रहा शामिल

दरभा डिविजनल कमेटी सचिव से लेकर बटालियन कमांडर तक का सफर तय करने वाला बारसे देवा कई घातक नक्सली वारदातों में शामिल रहा है। पुलिस के अनुसार उसके नेतृत्व में हुए हमलों में CRPF के कई जवान शहीद हुए थे।

ऑपरेशन कगार से कमजोर पड़ा संगठन

केंद्र सरकार द्वारा शुरू किए गए ऑपरेशन कगार के बाद माओवादी संगठन पर लगातार दबाव बना है। मुठभेड़ों में शीर्ष नेताओं के मारे जाने, बड़े पैमाने पर आत्मसमर्पण और हथियार डालने से संगठन की जमीनी ताकत कमजोर हुई है। हिड़मा के मारे जाने के बाद माओवादी कैडर में भ्रम और डर का माहौल बन गया, जिसके चलते आत्मसमर्पण को सुरक्षित रास्ता माना जा रहा है।

सिविल लिबर्टीज कमेटी ने उठाए सवाल

इस बीच सिविल लिबर्टीज कमेटी, तेलंगाना के अध्यक्ष और महासचिव ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर मांग की है कि बारसे देवा को जल्द से जल्द न्यायालय में पेश किया जाए। उन्होंने दावा किया है कि उसके साथ 15 अन्य लोगों को भी तेलंगाना-छत्तीसगढ़ सीमा के पास पुलिस ने हिरासत में लिया है।

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