किसान की खेती सिर्फ खेत तक सीमित नहीं होती, बल्कि उसका सीधा रिश्ता मौसम, बाजार, अंतरराष्ट्रीय राजनीति और सरकार की नीतियों से जुड़ा होता है। हाल के दिनों में खाद, मौसम, फसल उत्पादन और बाजार से जुड़ी कई अहम घटनाएं सामने आई हैं, जो देश की कृषि व्यवस्था को सीधे प्रभावित करती हैं।
यूरिया के दाम में बड़ी गिरावट, किसानों को राहत
वैश्विक बाजार में यूरिया की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई है। नेशनल फर्टिलाइज़र्स लिमिटेड (NFL) के ताजा टेंडर में पश्चिमी तट के लिए लगभग 49 डॉलर प्रति टन और पूर्वी तट के लिए 45 डॉलर प्रति टन की बोलियां मिली हैं।
अप्रैल में यही कीमतें लगभग 935 से 959 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गई थीं। यानी कुछ ही महीनों में 50 प्रतिशत से अधिक की गिरावट देखी गई है।
भारत में उर्वरक सब्सिडी का बड़ा हिस्सा यूरिया पर खर्च होता है। अनुमान के अनुसार कुल उर्वरक सब्सिडी का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा यूरिया पर ही जाता है। वित्त वर्ष 2024–25 के लिए उर्वरक सब्सिडी का कुल बजट लगभग ₹164 हजार करोड़ आंका गया है, जिसमें बड़ा हिस्सा यूरिया के लिए निर्धारित है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय कीमतें इसी स्तर पर बनी रहती हैं, तो सरकार पर सब्सिडी का दबाव कम हो सकता है और किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराना आसान होगा।
युद्ध और यूरिया का कनेक्शन
यूरिया का उत्पादन सीधे प्राकृतिक गैस पर निर्भर करता है। गैस से अमोनिया बनता है और अमोनिया से यूरिया तैयार होता है।
जब युद्ध या वैश्विक तनाव के कारण ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री रास्ते प्रभावित होते हैं, तो खाद की कीमतें बढ़ जाती हैं। हालात सामान्य होने पर कीमतों में गिरावट देखी जाती है। वर्तमान गिरावट इसी वैश्विक स्थिरता का परिणाम मानी जा रही है।
भारत दुनिया का सबसे बड़ा यूरिया आयातक देश है, इसलिए इसकी कीमतों में बदलाव का सीधा असर भारतीय कृषि अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
जैविक खाद की मांग में तेज बढ़ोतरी
इस खरीफ सीजन में जैविक खाद की खरीद 11 लाख टन तक पहुंच गई है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा केवल 3.2 लाख टन था। यानी लगभग तीन गुना से अधिक वृद्धि दर्ज की गई है।
यह संकेत है कि किसान अब रासायनिक खाद के साथ-साथ जैविक खेती की ओर भी तेजी से बढ़ रहे हैं।
खाद का पर्याप्त भंडार, सरकार का दावा
सरकारी आंकड़ों के अनुसार खरीफ 2026 के लिए लगभग 3.83 करोड़ टन उर्वरक की जरूरत आंकी गई है, जबकि करीब 2 करोड़ टन का स्टॉक पहले से उपलब्ध है।
राज्यों से कृषि अपडेट
- तमिलनाडु: कुरुवई धान उत्पादन बढ़ाने के लिए ₹134.83 करोड़ की योजना शुरू
- कर्नाटक: बारिश और नमी से प्याज की फसल में फंगस, किसानों को नुकसान
- पंजाब: बाढ़ के बाद तीन नई खरपतवार प्रजातियों की पहचान
- तमिलनाडु: धान उत्पादन और खाद्य सुरक्षा पर फोकस
मौसम विभाग की चेतावनी
मौसम विभाग ने देश के कई हिस्सों में तेज आंधी, बिजली और भारी बारिश की चेतावनी जारी की है।
- उत्तर भारत में तेज हवाएं और ओलावृष्टि की संभावना
- पूर्वोत्तर और पूर्वी राज्यों में भारी बारिश
- मध्य भारत और दक्षिण भारत में मानसून सक्रिय रहने की संभावना
किसानों को सलाह दी गई है कि वे फसल की सुरक्षा, जल निकासी और पशुओं की देखभाल पर विशेष ध्यान दें।
कुल मिलाकर तस्वीर मिली-जुली है। एक तरफ यूरिया की सस्ती कीमतें और पर्याप्त भंडार किसानों को राहत दे रहे हैं, वहीं मौसम की अनिश्चितता और कुछ फसलों में नुकसान चिंता बढ़ा रहे हैं। वैश्विक बाजार और मौसम के बदलते पैटर्न आने वाले समय में भारतीय कृषि की दिशा तय करेंगे।





