छत्तीसगढ़ के कोरबा–सरगुजा क्षेत्र स्थित हसदेव अरण्य में लगातार बढ़ रही कोयला खदानों और वन कटाई को लेकर स्थानीय आदिवासी समुदाय और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े संगठनों में गहरी चिंता बढ़ती जा रही है। क्षेत्र में प्रस्तावित और विस्तारित खनन परियोजनाओं के चलते जैव विविधता, वन्यजीवों और स्थानीय आजीविका पर गंभीर प्रभाव पड़ रही है।
इसी क्रम में केंते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक के वन क्षेत्र को लेकर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं, जहां खनन विस्तार के कारण बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई होनी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पूरा इलाका न केवल प्राकृतिक संपदा का केंद्र है, बल्कि आदिवासी समुदाय की आस्था और सांस्कृतिक पहचान से भी जुड़ा हुआ है।
केंते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक की वनक्षेत्र को नीचे की तस्वीर से समझिए।

इसी मुद्दे को लेकर 13 जून 2026 को एक विशेष परिचर्चा का आयोजन किया गया है, जिसमें आदिवासी प्रतिनिधि, स्थानीय नागरिक और पर्यावरण कार्यकर्ता शामिल होंगे। कार्यक्रम में हसदेव अरण्य और रामगढ़ क्षेत्र की सुरक्षा, खनन नीतियों के प्रभाव और वन संरक्षण के उपायों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी।
रामगढ़ पहाड़ को इस पूरे क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण आस्था और सांस्कृतिक धरोहर माना जाता है, जहां पर्यावरणीय दबाव बढ़ने से स्थानीय समुदाय चिंतित है।
यह परिचर्चा प्राकृतिक धरोहर और पारंपरिक आस्था स्थलों की रक्षा के लिए सामूहिक आवाज को मजबूत करने का प्रयास है। स्थानीय लोगों ने सभी संबंधित लोगों से इस कार्यक्रम में उपस्थित होकर सहयोग करने की अपील की है।




