छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कथित शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अपनी जांच को अंतिम रूप देते हुए अदालत में अंतिम चार्जशीट दाखिल कर दी है। करीब 3,000 करोड़ रुपये के इस बड़े आर्थिक अपराध मामले में अब तक कुल 81 लोगों को आरोपी बनाया गया है।
ईडी ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत तय समय-सीमा में यह चार्जशीट प्रस्तुत की, जिसमें लगभग 29,800 से अधिक पन्नों का विस्तृत दस्तावेज़ी रिकॉर्ड शामिल है। चार्जशीट में बैंकिंग लेन-देन, डिजिटल डेटा, इलेक्ट्रॉनिक चैट्स, कॉल डिटेल्स और अन्य तकनीकी साक्ष्यों को आधार बनाया गया है।
इस मामले में शुरुआती दौर में 22 लोगों को आरोपी बनाया गया था, जबकि ताजा चार्जशीट के साथ 59 नए नाम जोड़े गए हैं। इनमें वरिष्ठ आईएएस अधिकारी सौम्या चौरसिया, छत्तीसगढ़ के पूर्व आबकारी आयुक्त निरंजन दास, एफएल-10 लाइसेंसधारी, शराब कारोबारी और कई आबकारी विभाग से जुड़े अधिकारी शामिल बताए जा रहे हैं।
ईडी की ओर से पेश वकील सौरभ पांडे ने अदालत को बताया कि इस मामले में 315 पन्नों की विस्तृत अभियोजन रिपोर्ट (प्रॉसिक्यूशन समरी) भी दाखिल की गई है। जांच के दौरान सामने आया कि कथित मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध वसूली के इस नेटवर्क को योजनाबद्ध तरीके से संचालित किया गया।
ईडी का दावा है कि आबकारी विभाग में अधिकारियों की नियुक्तियों में भी जानबूझकर बदलाव किए गए, ताकि कथित अवैध व्यवस्था को बिना किसी रुकावट के चलाया जा सके। जांच में यह भी सामने आया कि निरंजन दास की नियुक्ति इसी उद्देश्य से की गई थी, जिससे घोटाले से जुड़ी गतिविधियों पर कोई सख्त कार्रवाई न हो।
चार्जशीट दाखिल होने के साथ ही यह हाई-प्रोफाइल मामला अब न्यायिक प्रक्रिया के अगले चरण में प्रवेश कर चुका है। ईडी ने अपराध से अर्जित संपत्तियों की जानकारी संबंधित एजेंसियों को सौंप दी है। आने वाले दिनों में इस मामले में अदालत में विस्तृत सुनवाई शुरू होने की संभावना है।







