छत्तीसगढ़ में अपराध का सैलाब ऐसा उफान मार रहा है कि आम आदमी की जान पर बन आई है। छोटी-मोटी बातों पर चाकूबाजों का तांडव रुकने का नाम नहीं ले रहा, और भूपेश बघेल सरकार की नाकामी ने पूरे प्रदेश को खौफजदा कर दिया है।
कल भिलाई में एक मामूली झगड़े में बीच-बचाव करने वाले युवक को चाकू मारकर क्रूर हत्या कर दी गई। आरोपी ने बेरहमी से कई वार किए, जिससे युवक की मौके पर ही मौत हो गई। उसी रात रायपुर में 16 साल के मासूम किशोर को पारिवारिक विवाद पर चाकू घोंप दिया गया—उसकी चीखें आज भी गूंज रही हैं!
ये अकेली घटनाएं नहीं। प्रदेश पुलिस के आंकड़ों से साफ झलकता है कि पिछले एक साल में चाकूबाजी के 500 से ज्यादा मामले दर्ज हुए, जिनमें 150 से अधिक हत्याएं। युवा पीढ़ी हिंसा की भेंट चढ़ रही है, लेकिन प्रशासन सोया हुआ है।
विपक्ष के नेता ने कटाक्ष किया, “सरकार ‘नक्सलमुक्त छत्तीसगढ़’ का दावा करती है, लेकिन सड़कों पर चाकूबाज घूम रहे हैं। क्या ये ‘अपराधमुक्त’ प्रदेश है? तत्काल लॉकडाउन और सख्त कानून लाएं, वरना जनता सड़कों पर उतरेगी!”
परिवारजन आक्रोशित हैं। भिलाई हत्याकांड में मृतक के भाई बोले, “पुलिस आती तो देर से, आरोपी फरार। न्याय कब मिलेगा?” रायपुर के किशोर के पिता ने आंसू पोंछते कहा, “मेरा बेटा कल स्कूल जाता, आज लाश। सरकार जिम्मेदार है!”
विशेषज्ञ चेताते हैं—शराब, ड्रग्स और बेरोजगारी हिंसा को हवा दे रही। फिर भी, पुलिस की पेट्रोलिंग नाममात्र की।
अब सवाल वही—कब जागेगी सरकार? अगर अभी नहीं, तो खून की नदियां बहेंगी। जनता इंतजार नहीं करेगी!



