शनिवार सुबह 11:45 बजे देशभर में करोड़ों मोबाइल फोन एक साथ गूंज उठे। तेज सायरन की आवाज के साथ स्क्रीन पर इमरजेंसी अलर्ट फ्लैश हो गया। सायरन थमने के बाद मैसेज पढ़कर भी सुनाया गया, जिससे कई लोग व्याकुल हो गए।
सोशल मीडिया पर ‘भूकंप आ गया क्या?’ जैसे सवालों की बाढ़ आ गई। लेकिन चिंता की कोई बात नहीं—यह राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) का सेल ब्रॉडकास्ट इमरजेंसी अलर्ट सिस्टम का परीक्षण था।
NDMA ने आपात स्थिति में आम लोगों तक रीयल-टाइम सूचना पहुंचाने के उद्देश्य से यह ट्रायल किया। सभी टेलीकॉम ऑपरेटरों—जैसे Jio, Airtel, Vodafone Idea और BSNL—के सहयोग से देश के सभी राज्यों की राजधानियों और दिल्ली-NCR क्षेत्र में एक साथ मैसेज भेजा गया। मैसेज हिंदी, अंग्रेजी और सभी क्षेत्रीय भाषाओं (जैसे तमिल, तेलुगु, बंगाली, मराठी आदि) में उपलब्ध था। इसमें स्पष्ट रूप से लिखा था: “यह एक टेस्ट मैसेज है। कोई कार्रवाई की आवश्यकता नहीं।”

सेल ब्रॉडकास्ट तकनीक: आपदा प्रबंधन में नया आयाम
सेल ब्रॉडकास्ट एक उन्नत तकनीक है, जो इंटरनेट या नेटवर्क कनेक्शन के बिना काम करती है। यह GSM, 3G, 4G और 5G नेटवर्क पर आधारित है और प्रभावित क्षेत्र के सभी फोनों पर एक साथ अलर्ट भेज सकती है। NDMA के एक अधिकारी ने बताया, “यह सिस्टम भूकंप, सुनामी, बाढ़ या रासायनिक रिसाव जैसी आपदाओं में तुरंत चेतावनी देगा।
अमेरिका और जापान जैसे देशों में यह सफलतापूर्वक चल रहा है। भारत में TRAI और DoT के दिशानिर्देशों के तहत इसे लागू किया जा रहा है।”
ट्रायल के दौरान कोई वास्तविक खतरा नहीं था, लेकिन कई उपयोगकर्ताओं ने इसे ‘डरावना’ बताया। मुंबई की रहने वाली शिल्पा सिंह ने सोशल मीडिया पर लिखा, “अचानक सायरन सुनकर दिल बैठ गया। कम से कम पहले सूचना हो जाती।” वहीं, दिल्ली के IT प्रोफेशनल राहुल वर्मा ने सराहना की: “अच्छी पहल है, लेकिन लोगों को पहले जागरूक करना चाहिए।”
NDMA की योजना: नियमित ट्रायल और जागरूकता अभियान
NDMA के महाद्वीप निर्देशक ने बताया कि यह पहला राष्ट्रीय ट्रायल था, और आगे नियमित परीक्षण होंगे। अगले चरण में ग्रामीण क्षेत्रों और सीमावर्ती इलाकों को शामिल किया जाएगा। प्राधिकरण जागरूकता अभियान भी चलाएगा, जिसमें स्कूलों, कॉलेजों और सोशल मीडिया के जरिए लोगों को अलर्ट सिस्टम के बारे में बताया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिस्टम भारत जैसे विविध देश के लिए वरदान साबित होगा। डिजास्टर मैनेजमेंट विशेषज्ञ डॉ. अनिल गुप्ता ने कहा, “पिछले वर्षों में चक्रवात ‘अम्फान’ और ‘यास’ जैसी घटनाओं में देरी से सूचना बनी समस्या। सेल ब्रॉडकास्ट इसे हल करेगा।”
ट्रायल सफल रहा, और NDMA ने सभी टेलीकॉम कंपनियों को बधाई दी। अब सवाल यह है कि क्या यह सिस्टम जल्द ही पूर्ण रूप से सक्रिय हो पाएगा?



