छत्तीसगढ़ में मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया इस समय तेजी से चल रही है। आयोग ने इसकी अवधि केवल 7 दिन बढ़ाई है, लेकिन कांग्रेस इसे बिल्कुल पर्याप्त नहीं मानती। कांग्रेस का कहना है कि वर्तमान हालात में एक महीने के भीतर यह प्रक्रिया पूरी करना आम लोगों के लिए संभव नहीं है, इसलिए SIR की अवधि को कम से कम तीन महीने तक बढ़ाया जाना चाहिए।
राज्य में इस समय धान कटाई और धान खरीदी का महत्वपूर्ण दौर चल रहा है। किसान खेतों में व्यस्त हैं, जिस वजह से वे अपने दस्तावेज तैयार कर फॉर्म जमा करने में असमर्थ हैं। दूसरी तरफ बस्तर संभाग के कई क्षेत्रों में आई बाढ़ से लोगों के जरूरी कागज बह गए या खराब हो चुके हैं। ऐसे में जल्दबाजी में दस्तावेज तैयार कर पाना मुश्किल हो जाता है, और इसके लिए अतिरिक्त समय की जरूरत है।
कांग्रेस ने यह भी बताया कि मनरेगा के काम बंद होने से बिलासपुर, मुंगेली, जांजगीर-चांपा, जशपुर और बस्तर से बड़ी संख्या में लोग रोज़गार के लिए अन्य राज्यों में पलायन कर चुके हैं। ये लोग अभी वापस नहीं आए हैं, इसलिए उनके लिए दस्तावेज तैयार करके SIR प्रक्रिया पूरी करना कठिन है। उनके लौटने और आवश्यक फॉर्म जमा करने में स्वाभाविक रूप से समय लगेगा।
सबसे गंभीर स्थिति बस्तर के उन 600 नक्सल प्रभावित गांवों की है, जहां लोग वर्षों से अपने गांव छोड़कर तेलंगाना और आंध्रप्रदेश में रह रहे हैं। कांग्रेस का कहना है कि इतने कम समय में इन गांवों के लोगों का SIR पूरा होना संभव ही नहीं है। आयोग को वास्तविक परिस्थिति समझकर उचित समय सीमा तय करनी चाहिए।
कांग्रेस का दावा है कि प्रक्रिया शुरू हुए 26 दिन हो चुके हैं, लेकिन अभी 50% से भी कम लोग अपने प्रपत्र जमा कर पाए हैं। ऐसे में बचे हुए दिनों में 100% लक्ष्य पूरा करना असंभव है। जबकि आयोग कागजों में 97% फॉर्म जमा होने का दावा कर रहा है, पर जमीन पर स्थिति बिल्कुल अलग है—कई लोगों तक फॉर्म अभी पहुँचे ही नहीं हैं।
कांग्रेस का तर्क है कि चुनाव में अभी तीन साल बाकी हैं, इसलिए इतना महत्वपूर्ण काम एक महीने में पूरा करने की कोई आवश्यकता नहीं है। यदि SIR की अवधि बढ़ाकर तीन महीने कर दी जाए, तो राज्य के सभी नागरिकों को पर्याप्त समय मिलेगा और मतदाता सूची अधिक सटीक रूप से तैयार हो सकेगी।



