स्मार्ट मीटर से जनता परेशान! बिजली कंपनी बैकफुट पर, बढ़े बिलों से मचा हंगामा

Madhya Bharat Desk
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प्रदेश में बिजली के स्मार्ट मीटर लगाने को लेकर शुरू हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। जावरा क्षेत्र में निजी बिजली कंपनी से जुड़े उपभोक्ताओं का कहना है कि स्मार्ट मीटर को स्मार्ट तो बना दिया गया, लेकिन आम जनता के लिए यह परेशानी का कारण बन गया है।

लोगों का कहना है कि पहले जहां बिजली बिल 500 से 700 रुपए तक आता था, अब वही बिल बढ़कर दो से तीन हजार तक पहुंच गया है। इससे आम उपभोक्ताओं की जेब पर भारी बोझ पड़ रहा है।

विरोध के आगे झुकी बिजली कंपनी

स्मार्ट मीटर के खिलाफ बढ़ते विरोध को देखते हुए सरकार की बिजली कंपनी डिस्कॉम अब बैकफुट पर आ गई है। कंपनी ने स्मार्ट मीटर इंस्टॉलेशन की अनिवार्यता को फिलहाल समाप्त कर दिया है।
प्रदेश में यह निर्णय इसलिए लिया गया क्योंकि लगभग हर जिले में लोगों ने इसका विरोध किया। कई स्थानों पर बिजली कंपनी के कर्मचारियों और स्थानीय निवासियों के बीच झड़पें भी हुईं।

देशभर में बढ़ा विरोध प्रदर्शन
पूरे देश में स्मार्ट मीटरों को लेकर विरोध प्रदर्शन जारी हैं। इसी क्रम में सागपुरा नगर परिषद क्षेत्र में भी लोग विरोध में उतर आए। यहां एक बिजली बोर्ड द्वारा लगाए गए मीटर में इनपुट और आउटपुट दोनों लगातार चालू पाए गए, जिससे उपभोक्ताओं को भारी नुकसान हो रहा है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि बिना विद्युत आपूर्ति के भी ये मीटर चालू रहते हैं, जिससे बिल बढ़ रहा है। निरीक्षण के दौरान FIT टीम द्वारा जांच में भी तकनीकी गड़बड़ी पाई गई।

स्मार्ट सिस्टम या स्मार्ट ठगी?
लोगों का आरोप है कि बिजली बोर्ड में लापरवाही लगातार बढ़ रही है। हर नए काम को “स्मार्ट सिस्टम” का नाम दिया जाता है, लेकिन जमीनी सच्चाई इससे अलग है।
राजनेताओं द्वारा जनता को “स्मार्ट इंडिया” के नाम पर सपने दिखाए जा रहे हैं, जबकि आम जनता बढ़े हुए बिजली बिलों से परेशान है।

छत्तीसगढ़ में बिजली उत्पादन, फिर भी महंगी दरें
छत्तीसगढ़ बिजली सरप्लस राज्य है। यहां राज्य, केंद्र और निजी क्षेत्रों को मिलाकर 30 हजार मेगावाट से अधिक बिजली का उत्पादन होता है। इसके बावजूद आम उपभोक्ताओं को महंगी बिजली खरीदनी पड़ रही है।

लोग सवाल उठा रहे हैं — जब हमारी जमीन, जंगल और पानी से बिजली बन रही है, तो हमें ही इतनी महंगी बिजली क्यों दी जा रही है?
छत्तीसगढ़ से कई राज्य रोशन हो रहे हैं, लेकिन स्थानीय नागरिकों को सोलर पैनल लगाकर बिजली बचाने का सपना दिखाया जा रहा है।

जनता का कहना है कि जब हमारे राज्य का कोयला दूसरे राज्यों को रोशनी दे सकता है, तो हमारे घरों में अंधेरा क्यों?

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