रायपुर: महिला एवं बाल विकास विभाग में सुचिता योजना के तहत सेनेटरी पैड की सप्लाई में भारी अनियमितता का मामला प्रकाश में आया है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, किशोरियों के स्वास्थ्य से जुड़े उत्पादों की आपूर्ति के लिए लगभग 1 करोड़ 13 लाख 75 हजार रुपये का ऑर्डर बिना किसी टेंडर प्रक्रिया के जारी कर दिया गया।
फर्नीचर फर्म को थमाया स्वच्छता का जिम्मा
इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि हाइजीन जैसे संवेदनशील उत्पादों की सप्लाई का जिम्मा कोरिया जिले की एक ऐसी फर्म को सौंपा गया है, जिसका मुख्य कार्यक्षेत्र फर्नीचर निर्माण है। स्वच्छता उत्पादों के क्षेत्र में अनुभवहीन फर्म को इतना बड़ा काम देना विभाग की मंशा पर गंभीर संदेह पैदा करता है।
भंडार क्रय नियमों और GeM पोर्टल की अनदेखी
भ्रष्टाचार के इस खेल में सरकारी नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई गई हैं। भंडार क्रय नियम 2022 और संशोधित नियम 2025 के अनुसार, शासकीय विभागों के लिए GeM (जैम) पोर्टल के माध्यम से ही खरीदी करना अनिवार्य है। बावजूद इसके, विभाग ने ऑनलाइन प्रक्रिया को दरकिनार कर ऑफलाइन आदेश जारी कर सीधे फर्म को उपकृत किया, जो सीधे तौर पर नियमों का उल्लंघन है।
लंबे समय से जमे अधिकारियों का ‘सिंडिकेट’
विभागीय सूत्रों के अनुसार इस अनियमितता के पीछे उन वरिष्ठ अधिकारियों का हाथ है, जो वर्षों से एक ही पद पर जमे हुए हैं। विभाग में पदस्थ उप संचालक वर्ष 2019 से और अतिरिक्त संचालक वर्ष 2015 से निरंतर कार्यरत हैं। इन अधिकारियों के राजनीतिक संबंध और पुराने रसूख को लेकर भी चर्चाएं हैं, जिससे इनके कार्यकाल के दौरान हुई प्रक्रियाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।
मंत्री के संरक्षण और कार्रवाई में देरी की चर्चा
यह मामला केवल प्रशासनिक चूक तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें राजनीतिक संरक्षण की भी सुगबुगाहट है। सूत्रों के मुताबिक, इन अधिकारियों को न केवल पूर्ववर्ती कांग्रेस शासन में संरक्षण प्राप्त था, बल्कि वर्तमान में मंत्री का वरदहस्त मिलने की चर्चा है। यही कारण माना जा रहा है कि इतनी बड़ी गड़बड़ी सामने आने के बाद भी अब तक कोई ठोस प्रशासनिक कार्रवाई नहीं हुई है। वर्तमान में विभाग द्वारा केवल जांच की औपचारिकता निभाने की बात कही जा रही है।







