जगदलपुर। माओवादी आंदोलन को लेकर एक बड़ा मोड़ सामने आया है। प्रतिबंधित संगठन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) की महाराष्ट्र-मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ विशेष जोनल कमेटी (एमएमसी जोन) ने संघर्ष को रोककर मुख्यधारा में लौटने की तरफ संकेत दिया है। इसके लिए संगठन ने तीनों राज्य सरकारों से 15 फरवरी 2026 तक का समय मांगा है, ताकि आत्मसमर्पण और पुनर्वास योजना पर सामूहिक और अंतिम निर्णय लिया जा सके।
कमेटी के प्रवक्ता ‘अनंत’ की ओर से 22 नवंबर को जारी पत्र में कहा गया है कि वे केंद्रीय कमेटी के नेताओं—कॉमरेड सोनू दादा और चंदना—द्वारा अस्थायी संघर्ष विराम के निर्णय का समर्थन करते हैं। उनका दावा है कि पार्टी ‘जनवादी केंद्रीयता’ के सिद्धांत पर चलती है, इसलिए अंतिम निर्णय तक सभी साथियों तक संदेश पहुंचाने में समय लगेगा।
सुरक्षा अभियान रोकने की मांग
माओवादियों ने तीनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों—विष्णुदेव साय, देवेंद्र फडणवीस और मोहन यादव—से अपील की है कि इस अवधि में सुरक्षा अभियानों को धीमा कर दिया जाए और जंगलों में विशेष कार्रवाई रोकी जाए। साथ ही, उन्होंने यह भरोसा भी दिया है कि इस बार पीएलजीए सप्ताह नहीं मनाया जाएगा, और संगठन हर प्रकार की गतिविधियों को विराम देगा, जिससे शांति की दिशा में सकारात्मक माहौल तैयार हो सके।
रेडियो प्रसारण की अपील
माओवादियों ने सरकार से एक असामान्य अनुरोध भी किया है—कि उनकी यह अपील कुछ दिनों तक रेडियो पर मुख्य समाचार से पहले प्रसारित की जाए, क्योंकि यही उनके दूरस्थ साथियों तक संदेश पहुंचाने का एकमात्र विश्वसनीय माध्यम है।
इसके अलावा, संगठन ने पत्रकारों और जनप्रतिनिधियों से मुलाकात की अनुमति मांगी है ताकि पुनर्वास योजना पर एक निश्चित तारीख निर्धारित की जा सके और प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके। उन्होंने पत्रकार समुदाय से मध्यस्थ की भूमिका निभाने की भी अपील की है।







