छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: सुप्रीम कोर्ट से 10 अफसरों को राहत, डायरेक्टर अतुल और मुकेश 8 दिन की रिमांड पर

Madhya Bharat Desk
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रायपुर। छत्तीसगढ़ में पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान हुए बहुचर्चित 32 सौ करोड़ रुपये के शराब घोटाले में बड़ी अपडेट सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को इस केस में आरोपी 28 आबकारी अफसरों में से 10 को राहत दी है। वहीं घोटाले से जुड़े मुख्य आरोपी और शराब कारोबारियों अतुल सिंह व मुकेश मनचंदा को रायपुर की विशेष अदालत ने 8 दिन की रिमांड पर भेज दिया है।

सुप्रीम कोर्ट से 10 अफसरों को राहत

जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जायमाला बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की बेंच ने सुनवाई करते हुए 10 आबकारी अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे 23 सितंबर को विशेष अदालत में पेश होकर व्यक्तिगत जमानत बांड जमा करें। बाकी 18 अधिकारियों की जमानत याचिकाओं पर अब 1 सितंबर को सुनवाई होगी। कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर 10 अक्टूबर तक जवाब भी मांगा है।

आरोप और कार्रवाई

ईओडब्ल्यू (EOW) ने इस घोटाले में 29 आबकारी अफसरों के खिलाफ चालान दाखिल किया था। इनमें 6 सेवानिवृत्त हो चुके हैं और एक की मौत हो चुकी है। बाकी 22 को निलंबित कर दिया गया था। इन अधिकारियों पर 2019 से 2023 के बीच 15 जिलों में पोस्टिंग के दौरान करीब 90 करोड़ रुपये की अवैध वसूली करने का आरोप है। हाईकोर्ट से जमानत याचिका खारिज होने के बाद सभी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

अतुल सिंह और मुकेश मनचंदा 8 दिन की रिमांड पर

ईओडब्ल्यू-एसीबी ने शुक्रवार को ओम साईं बेवरेजेस प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर अतुल सिंह और मुकेश मनचंदा को रायपुर लाकर विशेष अदालत में पेश किया। अदालत ने दोनों को 6 सितंबर तक ईओडब्ल्यू की रिमांड पर भेज दिया। अधिकारियों का कहना है कि दोनों से पूछताछ में घोटाले की पूरी रकम और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के नाम सामने आ सकते हैं।

झारखंड से जुड़ा कनेक्शन

करीब दो महीने पहले झारखंड की ईओडब्ल्यू ने शराब घोटाले की जांच में अतुल और मुकेश को गिरफ्तार किया था। तब से दोनों रांची जेल में बंद थे। अब छत्तीसगढ़ की ईओडब्ल्यू को शक है कि इनकी मदद से ही झारखंड में भी छत्तीसगढ़ जैसा अवैध नेटवर्क तैयार किया गया।

घोटाले की अहम कड़ी

ईओडब्ल्यू के अनुसार, इस घोटाले में होलोग्राम सप्लाई करने वाली प्रिज्म कंपनी का भी बड़ा रोल है। इसके एमडी विधु गुप्ता का नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ है। जांच एजेंसियों का मानना है कि इसी नेटवर्क के जरिए ठेकेदारों और अफसरों तक घोटाले का पैसा पहुंचता था। अतुल सिंह और मुकेश मनचंदा इस पूरे सिस्टम के मुख्य लिंक बताए जा रहे हैं। उनसे पूछताछ में और बड़े नाम सामने आने की संभावना है।

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