बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन के भीतर मतभेद की चर्चा तेज है। दूसरे चरण के मतदान में चार ऐसी सीटें हैं जहां राजद और कांग्रेस के प्रत्याशी आमने-सामने हैं। इन सीटों पर अब सबकी निगाह इस बात पर है कि राहुल गांधी और तेजस्वी यादव किसके लिए प्रचार करेंगे।
एनडीए लगातार महागठबंधन पर हमला बोल रहा है, आरोप लगाते हुए कि यह गठबंधन अंदर से टूटा हुआ है। हालांकि, महागठबंधन नेताओं का कहना है कि यह सिर्फ अफवाहें हैं और वे पूरी मजबूती से एकजुट हैं।
कौन-कौन सी सीटों पर है ‘फ्रेंडली फाइट’?
1. सुल्तानगंज विधानसभा सीट:
राजद के चंदन सिन्हा और कांग्रेस के ललन यादव के बीच टक्कर है। एनडीए से जदयू के ललित नारायण मंडल मैदान में हैं।
2. कहलगांव विधानसभा सीट:
राजद के रजनीश भारती और कांग्रेस के प्रवीण कुशवाहा आमने-सामने हैं। एनडीए से जदयू के शुभानंद मुकेश मैदान में हैं।
3. सिकंदरा विधानसभा सीट:
राजद के उदयनारायण चौधरी और कांग्रेस के विनोद चौधरी में मुकाबला है। एनडीए से हम पार्टी के प्रफुल्ल मांझी चुनावी मैदान में हैं।
4. नरकटियागंज विधानसभा सीट:
राजद के दीपक यादव और कांग्रेस के शाश्वत केदार पांडेय के बीच जंग है, जबकि भाजपा ने संजय पांडेय को टिकट दिया है।
5. चैनपुर विधानसभा सीट:
राजद के ब्रिज किशोर बिंद का सामना वीआईपी के गोविंद बिंद से है। जदयू के जमा खान भी मुकाबले में हैं।
6. करगहर विधानसभा सीट:
कांग्रेस के संतोष मिश्रा और सीपीआई के महेंद्र गुप्ता के बीच सीधी टक्कर है। एनडीए की ओर से जदयू के वशिष्ट सिंह उम्मीदवार हैं।
प्रचार से बच सकते हैं राहुल और तेजस्वी
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि छठ पर्व के बाद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और कांग्रेस के अन्य बड़े नेता बिहार में प्रचार अभियान शुरू करेंगे। वहीं, तेजस्वी यादव पहले ही ताबड़तोड़ जनसभाएं कर रहे हैं। लेकिन अब तक वे ‘फ्रेंडली फाइट’ वाली सीटों पर नहीं पहुंचे हैं।
सूत्रों का कहना है कि राहुल और तेजस्वी इन सीटों पर प्रचार से दूरी बनाए रख सकते हैं, ताकि गठबंधन में विवाद की स्थिति न बने।
गहलोत बोले— महागठबंधन एकजुट है
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बयान दिया कि,
“बिहार में महागठबंधन पूरी एकजुटता के साथ चुनाव लड़ रहा है। कुछ सीटों पर आपसी सहमति से फ्रेंडली फाइट हो रही है। एनडीए अफवाह फैला रहा है, लेकिन हम मिलकर प्रचार करेंगे और चुनाव जीतेंगे।”
गहलोत ने आगे कहा कि महागठबंधन ने अपना मुख्यमंत्री चेहरा घोषित कर दिया है, जबकि एनडीए अब तक इस पर चुप है। भाजपा अब नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री नहीं बनाना चाहती।
बिहार चुनाव में यह देखना दिलचस्प होगा कि राहुल गांधी और तेजस्वी यादव फ्रेंडली फाइट वाली सीटों पर किस रणनीति के तहत प्रचार करते हैं। फिलहाल, महागठबंधन के भीतर इस मुद्दे पर सियासी सुगबुगाहट जारी है।







