पटना: बिहार विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने एक बार फिर बड़ा कदम उठाया है। पार्टी ने बगावत और अनुशासनहीनता के आरोप में पूर्व मंत्री और विधायक समेत पांच नेताओं को निलंबित कर दिया है। इससे पहले शनिवार को 11 नेताओं को बाहर का रास्ता दिखाया गया था।
पार्टी अनुशासन पर सख्त नीतीश कुमार:
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बगावत करने वाले नेताओं पर लगातार कार्रवाई शुरू की है। रविवार को जिन पांच नेताओं पर गाज गिरी है, उनमें भागलपुर के गोपालपुर विधानसभा से चार बार विधायक रह चुके गोपाल मंडल का नाम सबसे चर्चित है। जेडीयू के प्रदेश महासचिव चंदन कुमार सिंह ने इनके निष्कासन की सूचना पत्र जारी कर दी है।
आज इन पर ही कार्रवाई
शनिवार को 11 नेताओं पर गिरी थी गाज:
बीते शनिवार को जेडीयू ने 11 नेताओं को पार्टी से निष्कासित किया था। इनमें प्रमुख नाम थे — मुंगेर-जमालपुर के पूर्व मंत्री शैलेश कुमार, जमुई-चकाई के पूर्व एमएलसी संजय प्रसाद, सीवान-बड़हरिया के पूर्व विधायक श्याम बहादुर सिंह, भोजपुर-बड़हरा के पूर्व एमएलसी रणविजय सिंह, शेखपुरा-बरबीघा के पूर्व विधायक सुदर्शन कुमार, बेगूसराय के अमर कुमार सिंह, वैशाली की डॉ. आसमा परवीन, औरंगाबाद के लव कुमार, कटिहार की आशा सुमन, पूर्वी चंपारण के दिव्यांशु भारद्धाज और सिवान के विवेक शुक्ला।
पार्टी ने स्पष्ट कहा है कि अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधियों को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
गोपाल मंडल का टिकट कटने पर फूटा गुस्सा:
चार बार के विधायक गोपाल मंडल का टिकट इस बार काटा गया, जिससे नाराज होकर उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया। इसके बाद जेडीयू ने रविवार को उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया। पत्र में कहा गया कि मंडल लगातार पार्टी की विचारधारा और संगठनात्मक अनुशासन का उल्लंघन कर रहे थे। कई बार चेतावनी देने के बावजूद उन्होंने सुधार नहीं दिखाया, जिसके चलते यह कार्रवाई की गई।
नामांकन के बाद भावुक हुए थे गोपाल मंडल:
नामांकन के बाद गोपाल मंडल एक जनसभा में फूट-फूट कर रो पड़े थे। उन्होंने कहा, “नीतीश कुमार को बहका कर मेरा टिकट कटवा दिया गया। अगर मुझसे कोई गलती हुई है तो माफ कर दीजिए, एक बार वोट दीजिए। मैंने कभी गलत काम नहीं किया है और न करूंगा।”
जेडीयू का सख्त संदेश:
जेडीयू ने स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी अनुशासन और नेतृत्व के खिलाफ जाने वाले किसी भी नेता को बख्शा नहीं जाएगा। नीतीश कुमार का यह कदम बिहार चुनाव से पहले पार्टी में एकजुटता बनाए रखने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।







