नई दिल्ली। भारत अब दुनिया के सबसे बड़े महिला प्रतिनिधित्व वाले लोकतंत्र बनने की ओर बढ़ रहा है। संसद में पेश किए गए महिला आरक्षण से जुड़े संशोधन विधेयकों के जरिए ऐसा नया राजनीतिक समीकरण तैयार किया जा रहा है, जो देश की सत्ता संरचना को पूरी तरह बदल सकता है।
प्रस्ताव के मुताबिक, लोकसभा की सीटों को 543 से बढ़ाकर 815 किया जाएगा। इस नई व्यवस्था में 272 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। यानी संसद में हर तीसरी आवाज महिला की होगी जो अब तक सिर्फ 14% के आसपास सीमित थी।
यह बदलाव केवल संख्या बढ़ाने का नहीं, बल्कि महिलाओं को निर्णय लेने की प्रक्रिया में बराबरी का अधिकार देने का प्रयास है। अब तक संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी बेहद कम रही है, जिससे कई अहम मुद्दे हाशिए पर रह जाते थे।
नई योजना के तहत यह बदलाव परिसीमन (Delimitation) के जरिए होगा, जिसमें जनसंख्या के आधार पर सीटों की संख्या और सीमाएं तय की जाएंगी। लंबे समय से सीटों की संख्या 1971 की जनगणना के आधार पर स्थिर थी, लेकिन अब इसे बदलने की तैयारी है।
सरकार की कोशिश है कि यह पूरा ढांचा 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले लागू हो जाए। इसके बाद भारत न सिर्फ संख्या के लिहाज से, बल्कि महिला भागीदारी के मामले में भी दुनिया के शीर्ष लोकतंत्रों में शामिल हो जाएगा।
यह कदम उन लाखों महिलाओं के लिए उम्मीद की नई किरण है, जो अब तक राजनीति में अपनी जगह बनाने के लिए संघर्ष कर रही थीं। संसद में उनकी बढ़ती भागीदारी से नीति निर्माण में शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और समानता जैसे मुद्दों को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
अब नजर संसद में होने वाली वोटिंग पर टिकी है, जो तय करेगी कि भारत इस ऐतिहासिक बदलाव की ओर कितनी तेजी से बढ़ता है।



