छत्तीसगढ़ में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को लेकर शुरू हुई पहल पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का तीखा प्रतिक्रिया सामने आया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार ने राज्य में UCC लागू करने की संभावनाओं को लेकर एक कमेटी गठित करने का फैसला लिया है, जिसकी कमान एक रिटायर्ड जज को सौंपी जाएगी।
लेकिन इस फैसले के सामने सबसे मजबूत और तीखा विरोध पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की ओर से देखने को मिला है। बघेल ने इस मुद्दे को सीधे आदिवासी अस्मिता और पहचान से जोड़ते हुए सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में UCC लागू करना सीधा-सीधा आदिवासी समाज की परंपराओं पर चोट होगा। उन्होंने याद दिलाया कि राज्य में 41 से अधिक जनजातियां हैं, जिनकी अपनी-अपनी अलग सामाजिक व्यवस्था, रीति-रिवाज और जीवनशैली है।
बघेल का तर्क है कि इन परंपराओं को सिर्फ समाज ही नहीं, बल्कि न्यायालय और सरकार भी मान्यता देती आई है। ऐसे में सबको एक समान कानून के दायरे में लाना न सिर्फ अव्यावहारिक है, बल्कि यह सांस्कृतिक विविधता को खत्म करने जैसा कदम होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि केवल आदिवासी ही नहीं, बल्कि ओबीसी और अन्य वर्गों में भी अलग-अलग परंपराएं और सामाजिक मान्यताएं हैं। “क्या सबको एक ही पैमाने पर तौलना सही होगा?” यह सवाल उठाते हुए बघेल ने सरकार के फैसले पर गंभीर आपत्ति जताई।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बघेल ने इस मुद्दे को भावनात्मक और सामाजिक दोनों स्तर पर उठाकर सरकार को बैकफुट पर ला दिया है। जहां सरकार इसे समानता की दिशा में पहल बता रही है, वहीं विपक्ष इसे पहचान और अधिकारों के खिलाफ कदम के रूप में पेश कर रहा है।



