DMF के 500 करोड़ में बड़ा खेल! अब CBI खोलेगी फाइलें, कई बड़े नाम रडार पर

Madhya Bharat Desk
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रायपुर।छत्तीसगढ़ में डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन (DMF) से जुड़े करीब 500 करोड़ रुपये के कथित घोटाले ने अब नया मोड़ ले लिया है। लंबे समय से चर्चा में रहे इस मामले की जांच अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपी गई है, जिससे प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।

खनिज विभाग के डायरेक्टर रजत बंसल ने बिलासपुर संभाग आयुक्त को पत्र जारी कर डीएमएफ मद से स्वीकृत सभी संदिग्ध परियोजनाओं की गहन जांच कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं। यह कार्रवाई पूर्व गृह मंत्री ननकीराम कंवर द्वारा प्रधानमंत्री कार्यालय और CBI को भेजी गई शिकायतों के बाद तेज हुई है।

बताया जा रहा है कि डीएमएफ फंड का उपयोग उन क्षेत्रों में होना था, जहां खनन से प्रभावित लोगों को स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, पर्यावरण संरक्षण और रोजगार जैसे बुनियादी लाभ मिल सकें। लेकिन जांच में सामने आया है कि कई जिलों, खासकर कोरबा, में करोड़ों रुपये ऐसी परियोजनाओं पर खर्च किए गए, जिनका न तो प्राथमिक सूची से कोई लेना-देना था और न ही स्थानीय जरूरत से।

CBI ने राज्य सरकार से इस पूरे मामले से जुड़े अनुमोदन प्रस्ताव, तकनीकी स्वीकृति पत्र, फंड उपयोग के दस्तावेज, परियोजनाओं की प्रगति रिपोर्ट और लाभार्थियों से जुड़े रिकॉर्ड तलब किए हैं। आरोप हैं कि कई फाइलें नियमों को ताक पर रखकर विवेकाधीन आधार पर मंजूर की गईं।

इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) की रिपोर्ट के आधार पर आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) भी जांच में जुट चुकी है। ईडी ने टेंडर प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं की ओर इशारा करते हुए दावा किया है कि कोरबा डीएमएफ फंड के जरिए ठेके आवंटन में सुनियोजित तरीके से खेल किया गया।

जांच एजेंसियों के अनुसार, ठेकेदारों और बिचौलियों के जरिये अधिकारियों और राजनीतिक रसूखदारों तक 25 से 40 प्रतिशत तक कमीशन पहुंचाया गया। इस अवैध लेन-देन को छिपाने के लिए फर्जी आवासीय और अन्य खर्चों के बिलों का सहारा लिया गया। अब सभी की निगाहें CBI की जांच पर टिकी हैं, जिससे आने वाले दिनों में कई बड़े खुलासों की संभावना जताई जा रही है।

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