कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद शशि थरूर ने ‘ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन विधेयक, 2026’ को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने इस प्रस्तावित कानून को न सिर्फ जल्दबाजी में लाया गया बताया, बल्कि इसे ट्रांसजेंडर समुदाय के अधिकारों के लिए एक बड़ा झटका भी करार दिया।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर अपनी बात रखते हुए थरूर ने कहा कि भले ही वह केरल में चुनावी व्यस्तताओं के कारण संसद में मौजूद नहीं हैं, लेकिन वे वहां हो रही हर विधायी गतिविधि पर नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि यह विधेयक बिना पर्याप्त चर्चा और संबंधित पक्षों से संवाद के पेश किया गया है, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल खड़ा करता है।
थरूर के मुताबिक, यह संशोधन NALSA v. Union of India के ऐतिहासिक फैसले से स्थापित अधिकारों के ढांचे को कमजोर करता है। यह वही फैसला था, जिसने ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को अपनी पहचान खुद तय करने का अधिकार दिया था।
उन्होंने खास तौर पर इस बात पर आपत्ति जताई कि प्रस्तावित बदलावों में अब व्यक्ति की लैंगिक पहचान को मान्यता देने के लिए मेडिकल बोर्ड और सरकारी प्रमाणन अनिवार्य किया जा रहा है। उनके अनुसार, इससे व्यक्ति की स्वतंत्रता और गरिमा पर सीधा असर पड़ेगा—क्योंकि अब सरकार तय करेगी कि कोई व्यक्ति खुद को क्या मानता है।
इसके अलावा, थरूर ने विधेयक में ट्रांसजेंडर की परिभाषा को सीमित करने पर भी चिंता जताई। उनका मानना है कि इससे ट्रांस-पुरुष, ट्रांस-महिलाएं और नॉन-बाइनरी जैसे कई समूह कानूनी दायरे से बाहर हो सकते हैं, जो पहले से ही हाशिए पर हैं।
निजता को लेकर भी उन्होंने बड़ा सवाल उठाया। विधेयक में सर्जरी से जुड़ी जानकारी अधिकारियों को देना अनिवार्य किए जाने पर उन्होंने इसे खतरनाक बताया। उन्होंने कहा कि यह कदम Justice K.S. Puttaswamy vs Union of India के तहत मिले निजता के अधिकार के खिलाफ जाता है।
थरूर का मानना है कि इस तरह के बड़े और दूरगामी प्रभाव वाले विधेयक को संसद की स्थायी समिति के पास भेजा जाना चाहिए, ताकि हर पहलू पर गहराई से विचार किया जा सके।
उन्होंने सरकार के उस तर्क पर भी सवाल उठाया, जिसमें कहा गया है कि यह बदलाव योजनाओं को सही लाभार्थियों तक पहुंचाने के लिए हैं। थरूर ने पलटकर पूछा कि जब पात्रता का दायरा ही सीमित कर दिया जाएगा, तो असली लाभार्थी कैसे शामिल हो पाएंगे?
अपने दूसरे पोस्ट में उन्होंने कहा कि सरकार को जांच-पड़ताल बढ़ाने के बजाय ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा जैसे अधिकारों को मजबूत करना चाहिए। उन्होंने ‘क्षैतिज आरक्षण’ जैसे उपायों की भी वकालत की।
अंत में थरूर ने कहा कि ट्रांसजेंडर समुदाय भी देश के नागरिक हैं और उन्हें समान अधिकार मिलना चाहिए। कोई भी कानून जो इस मूल भावना को कमजोर करता है, वह संविधान की आत्मा के खिलाफ है।



