नई दिल्ली। संसद में राजनीतिक बहस उस समय दिलचस्प मोड़ लेती नजर आई, जब नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अपने संबोधन में मार्शल आर्ट का उदाहरण देते हुए रणनीति और पकड़ (ग्रिप) की अहमियत समझाई। उन्होंने कहा कि किसी भी मुकाबले की बुनियाद मजबूत ‘ग्रिप’ से शुरू होती है और वही आगे की दिशा तय करती है।
राहुल गांधी के इस उदाहरण पर प्रतिक्रिया देते हुए सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने तंज कसते हुए भारतीय खेलों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि मार्शल आर्ट विदेशी खेल है, जबकि भारत की अपनी परंपरागत खेल संस्कृति कहीं अधिक मजबूत और प्रभावी है।
अग्रवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘धोबी पछाड़’ जैसे कुश्ती के दांव जानते हैं और यही वजह है कि लगातार तीन चुनावों में जीत दर्ज की गई। उन्होंने विपक्ष पर कटाक्ष करते हुए कहा कि राजनीति में सफलता के लिए भारतीय खेलों—जैसे कुश्ती और कबड्डी—की समझ जरूरी है।
उन्होंने आगे कहा कि जब तक भारतीय सोच और जमीनी समझ विकसित नहीं होगी, तब तक विपक्ष को सत्ता से दूर ही रहना पड़ेगा। अग्रवाल ने प्रधानमंत्री मोदी को गांव, गरीब, किसान, मजदूर और युवाओं की चिंता करने वाला नेता बताते हुए कहा कि उनकी जमीनी पकड़ ही उनकी राजनीतिक ताकत है।
संसद में इस तरह के खेल-संदर्भों के जरिए दोनों नेताओं ने अपने-अपने राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की। एक ओर रणनीति की ‘ग्रिप’ का जिक्र था, तो दूसरी ओर भारतीय परंपरा और देसी दांव-पेंच का हवाला।



